सरकार की नाकामी ने पहाड़ की जनता की जान को जोखिम में डाला : राणा

Jul 26, 2020 19:52 |
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कोविड-19 से निपटने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है सरकार

हमीरपुर 26 जुलाई

कोविड-19 महामारी से निपटने में नाकाम हुई प्रदेश सरकार ने पहाड़ की जनता की जान पर बड़ा जोखिम खड़ा कर दिया है। यह बात राज्य कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं विधायक राजेंद्र राणा ने यहां जारी प्रेस बयान में कही है। सत्ता का दुरुपयोग करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने जिस गैर जिम्मेदारी से महामारी को सचिवालय से लेकर हाईकोर्ट व आईजीएमसी तक को आफत में डाला है। वह अपने आप में सरकार की नाकामी का सबूत है। प्रदेश को कोरोना मुक्त करने चली सरकार के राज में अब विधानसभा के एमएलए फ्लैट तक नहीं महफूज रहे हैं। वहां भी अब कोरोना ने अपने पैर पसारे हैं, जिसकी जिम्मेदारी भी सरकार पर लगी है। विधानसभा के आवासों को तमाम नियमों को तार-तार कर सब्लेट किया है। हाल ही के घटे घटनाक्रम में सब्लेट किए गए बीजेपी के एमएलए के फ्लैट में सिरमौर का कोई परिवार ठहरा हुआ था, जो कि कोरोना ग्रस्त पाया गया है। राणा ने कहा कि सरकार को बताना होगा कि यह उनके किस एमएलए की कारगुजारी के कारण संभव हुआ है और किस हैसियत और किसकी अनुमति से यह परिवार एमएलए आवास में ठहरा था। उन्होंने आरोप जड़ा है कि प्रदेश को कोरोना मुक्त करने चली जयराम सरकार महामारी से निपटने में पूरी तरह नाकाम रही है और अब प्रदेश के आठ जिलों में स्थिति विस्फोटक व भयानक होती जा रही है। सरकार के अपने आंकड़े बता रहे हैं कि छोटे से प्रदेश में कोरोना का कहर 2100 नागरिकों को अपनी चपेट में ले चुका है और अब रोजाना 100 से ज्यादा मामले निरंतर सामने आ रहे हैं। राणा ने कहा कि कोरोना काल में डेमोक्रेटिक सेटअप में सरकार नाम की कोई चीज नजर नहीं आ रही है। प्रदेश की जनता पर चुनी हुई सरकार के बावजूद प्रशासनशाही का बोलबाला चल रहा है। यहां तक कि मंत्रीमंडल का रोल भी लोकतांत्रिक सरकार में पूरी तरह नदारद दिख रहा है। जिन मंत्रियों की ड्यूटी जिलों में कोरोना से निपटने के लिए लगी है, वह मंत्री निष्क्रिय साबित होते हुए अपनी जान बचाए छुप रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ओक ओवर में बैठ कर रिमोट से महामारी को नियंत्रण करने में लगे हैं। प्रदेश में अब जिस तरह कोरोना का कहर टूटा है उसके आरोप भाजपा कुनबे पर लगे हैं। इससे बड़ी बात क्या होगी कि अब विधानसभा परिसर तक को कोरोना ने अपनी कुंडली की गिरफ्त में ले लिया है। जहां एमएलए के सब्लेट किए हुए मकानों तक अब महामारी ने अपने पैर पसारे हैं। कोरोना जैसी घातक महामारी की मिस हैंडलिंग से प्रमाणित हो चुका है कि सरकार कोविड-19 को लेकर कतई गंभीर नहीं है। प्रदेश में लोकतांत्रिक सरकार का अहसास व आभास पूरी तरह गौण होकर रह गया है। राणा ने कहा कि अब सरकार ने कोरोना को भी कमाई का धंधा बनाने के लिए व आम आदमी का खून चूसने के लिए मास्क न लगाने पर 8 दिन की जेल व 5 हजार जुर्माने का तुगलकी फरमान सुनाया है। राणा ने सवाल खड़ा किया है कि क्या बीजेपी के लोग कोरोना फ्री हैं? क्या उन पर कोरोना के प्रोटोकॉल का कोई कायदा-कानून लागू नहीं होता है और अगर होता है तो फिर अपने एमएलए व प्रवक्ता पर भी उन्हीं धाराओं के तहत मामले दर्ज करे। जिन धाराओं को आम आदमी पर लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अफसरशाही के चुंगुल में फंसा प्रदेश मंहगाई व महामारी के कहर से बिलबिला रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर कह रहे हैं कि कोविड-19 को लेकर प्रदेश के नागरिक लापरवाह हो गए हैं। अगर जनता के लापरवाह होने की स्थिति भी बनी है तो उसकी जिम्मेदार भी प्रदेश सरकार है। क्योंकि आम आदमी बीजेपी की सत्ता का दुरुपयोग कर रहे उन लोगों का अनुसरण कर रहा है जो प्रदेश में खुलेआम दनदनाते फिर रहे हैं और कोरोना को राजधानी से लेकर जिला दर जिला फैलाते फिर रहे हैं। राणा ने कहा कि बीजेपी के अपने सांसद ने सरकार पर आरोप लगाए हैं कि कोरोना काल में उनके जिले में भारी घपले-घोटाले हैं, जिसकी लीपापोती में अब सरकार जुटी हुई है। राणा ने कहा कि अब आलम यह है कि मंहगाई व महामारी की दोहरी आफत झेल रही सरकार के राज में प्रदेश की जनता दलालों व माफिया के रहमोकरम पर जी रही है। विभागों पर माफियाओं व दलालों का बोलबाला है। जिस पर विपक्ष जब आवाज उठाता है तो बीजेपी के लोग राजनीति करने के आरोप कांग्रेस पर लगाते हैं। राणा ने कहा कि कुल मिलाकर कोविड-19 ने निपटने के लिए सरकार की जो नाकामी व नालायकी सामने आई है, उसमें अब प्रदेश का कोई भी नागरिक खुद को महफूज नहीं पा रहा है।