लैंड एक्यूजिशन में फैक्टर टू के तहत किसानों को मुआवजा दे सरकार : राणा

Jul 27, 2020 16:15 |
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मनाली-जीरकपुर फोरलेन व मंडी में बनने वाले एयरपोर्ट पर मुआवजे की स्थिति भी सपष्ट करे

सरकार हमीरपुर 27 जुलाई

सत्ता में आने से पहले जो बीजेपी भूमि अधिग्रहण मामले पर फैक्टर वन और फैक्टर टू के तहत किसानों को मुआवजा देने की वकालतें करते नहीं थकती थी। वही बीजेपी सत्ता में आने के बाद अब मुआवजे के नाम पर चर्चा तक नहीं करना चाह रही है। यह बात राज्य कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं विधायक राजेंद्र राणा ने यहां जारी प्रेस बयान में कही है। राणा ने कहा कि प्रदेश की जनता व भुगतभोगी किसान गवाह हैं कि कांग्रेस के वीरभद्र कार्यकाल में बीजेपी विपक्ष में रहते हुए लगातार किसानों के मुआवजे के लिए धरना-प्रदर्शन का नाटक करती रही, लेकिन जब मुआवजा देने की अपनी बारी आई तो अब सरकार की बोलती पूरी तरह बंद है। कांग्रेस कार्यकाल में जीरकपुर-मनाली फोरलेन मामले में मुआवजे का मुखिया बना अब सत्ता सुख के हिलोरे लेता हुआ मौन मुद्रा में है। तब किसानों के मुआवजे की पैरवी कर रहा यह मुखिया बात-बात पर धरना-प्रदर्शन करने की बात करता रहा है, लेकिन जैसे ही इस पूर्व सैन्य अधिकारी ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह को सरकार ने सैनिक निगम का चेयरमैन बनाया, तो किसानों की आवाज उठाने वाले ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह की आवाज भी सत्ता रसूख में दब कर रह गई है। सत्ता के साथ समझौता होते ही और चेयरमैन का पद मिलते ही अब ब्रिगेडियर किसानों की सारी फिक्र भूल बैठे हैं। राणा ने कहा कि भारत सरकार की नोटिफिकेशन के मुताबिक लैंड एक्यूजिशन एक्ट में फैक्टर वन और फैक्टर टू के तहत किसानों को मुआवजा देना होता है, जो कि राज्य सरकार को तय करना होता है। फैक्टर वन में किसानों को सर्कुलर रेट का दोगुना व फैक्टर टू में किसानों को सर्कुलर रेट का चार गुना मुआवजा नोटिफिकेशन के मुताबिक देना होता है। राणा ने बड़ा सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि सरकार जनता को बताए कि सत्ता में आने के बाद फैक्टर टू के तहत कितने किसानों को कितना मुआवजा दिया है? उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि किसानों की वकालत करने वाली बीजेपी अब मुआवजे पर चर्चा ही नहीं करना चाहती है। क्योंकि बीजेपी ने किसानों को मुआवजे का झूठा झांसा देकर सत्ता हासिल कर ली है और जो सैन्य अधिकारी इस किसानों के मुआवजे की वकालत करते थे, उन्हें सैनिक निगम के चेयरमैन का पद मिल गया है। बस सत्ता के इस समझौते के साथ ही अब किसानों के मुआवजे पर सरकार बात ही नहीं करना चाहती है। राणा ने कहा कि सरकार स्थिति सपष्ट करे कि क्या प्रदेश के किसानों को फैक्टर टू के तहत मुआवजा दिया जाएगा या नहीं?बॉक्सराणा ने कहा कि उधर मंडी में बनने वाले एयरपोर्ट के निर्माण में 51 फीसदी राज्य सरकार व 49 फीसदी केंद्र सरकार को खर्च करना होता है। इसके अलावा साइट डेवलपमेंट का सारा खर्च राज्य सरकार को करना होता है। यहां भी भूमि अधिग्रहण पर विपक्ष में रहते हुए किसानों की वकालत करने वाली बीजेपी बताए कि क्या अब फैक्टर टू के तहत किसानों को मुआवजा मिलेगा या नहीं? राणा ने कहा कि कोविड-19 में कंगाली के दौर से गुजर रही सरकार एयरपोर्ट पर अपने हिस्से का 51 फीसदी कहां से और कैसे खर्च करेगी यह भी बड़ा सवाल है? जबकि केंद्र से झूठे शगुफों व आश्वासनों के सिवाय अभी तक सरकार को कुछ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार सुनिश्चित करे कि एयरपोर्ट निर्माण में प्रभावित किसानों को फैक्टर टू के तहत मुआवजा मिले।