कोरोना के कारण हजारों मौतों की गुनहगार सरकार का जश्न बेदर्द कदम : राणा

Dec 27, 2020 15:50 | Poltics
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किसान ठिठुर रहे हैं, मर रहे हैं लेकिन बेदर्द सरकार जश्नों में मस्त हो रही है


हमीरपुर 27 दिसंबर 

3 वर्ष के विकास का राग आलाप रही सरकार के कार्यकाल की सच की स्थिति यह है कि प्रदेश में विकास भ्रष्टाचारियों, दलाल माफियों, खनन माफियों व अफसरशाही का हुआ है। जबकि आम आदमी बीजेपी के इस राज के तीन सालों में हाल-बेहाल हुआ है। सही मायनों में हिमाचल की जनता इस निक्कमी सरकार से सबसे ज्यादा आहत व प्रताडि़त हुई है।
राज्य सरकार के तीन साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का भाषण मात्र झूठ का पुलिंदा है। यह बात हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं सुजानपुर के विधायक राजेन्द्र राणा ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कही है। राणा ने कहा कि प्रदेश में कोरोना के कारण हजारों लोग मौत का शिकार हुए हैं। जबकि सड़कों पर किसान ठंड से ठिठुर और मर रहे हैं, लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं। ऐसे में जश्न मनाने की असंवेनशीलता कोई बेदर्द सरकार ही कर सकती है। जो कि बीजेपी सरकार ने जश्न मनाकर साबित किया है।
राणा ने कहा बेहतर होता कि सरकार जनता से प्रदेश के आवाम की बदहाली व आर्थिक बदहाली के लिए क्षमा मांगती हुई आगे बेहतर करने का प्रण लेती लेकिन सरकार तो अपने झूठे जश्न मनाने में मस्त और व्यस्त है। कोरोना काल में जहां पूरा विश्व एकजुट होकर कोरोना के खिलाफ  युद्ध लड़ रहा है। जहां छोटे बच्चों ने अपनी गुल्लकें तोड़ कर सरकार को दान दिया हैं वहीं इस इस सरकार ने कोरोना के कुप्रबंधन में हिमाचल की नाक पूरे विश्व में कटवाई है।
स्वास्थ विभाग के सबसे बड़े अधिकारियों पर पीपीई किट खरीद और अन्य सामान खरीद में भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप लगे हैं। जिसके छींटों ने सरकार और संगठन के मुखियों के दामन को भी दागदार किया है। कोरोना काल में कुप्रबंधन के चलते आज हिमाचल में प्रतिशतता के हिसाब से देश में सबसे ज्यादा केस हैं। राणा ने कहा कि इस सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन के कारण आज हिमाचल कंगाली की कगार पर खड़ा है। जिस इन्वेस्टर मीट का बखान करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने भाषण में कहा कि इस से 96000 करोड़ के उद्योग हिमाचल में आएंगे। उस पर सिर्फ 13600 करोड़ के उद्योग की ग्राउंड ब्रेकिंग हिमाचल में हुई, जिससे साबित होता है कि मुख्यमंत्री सिर्फ हवा-हवाई बातें करते हैं जबकि जमीनी हकीकत बद से बदतर है। दूसरी ओर सरकार को यह भी बताना जरूरी है कि सरकार केंद्र सरकार से बार-बार ऋण लेकर सांसे लेने के लिए लाचार क्यों है? राणा ने कहा कि सरकार सिर्फ पुरानी कांग्रेस सरकार की योजनाओं के नाम बदलकर और उनके किए कामों का श्रेय लेनें में मशगुल है। चाहे वो बुजुर्गों, विकलांगों की पेंशन योजना हो या दूसरी योजनाएं हों। जनमंच के नाम पर सरकार ने सिर्फ कर्मचारियों व अधिकारियों को जलालत देने का काम किया है। जनमंच सरकारी कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से बेईज्जत करने के लिए झंडमंच साबित हुआ है।
राजेन्द्र राणा ने कहा कि किसी भी राज्य सरकार की अपनी एक स्वायत्तता होती है जो उस राज्य की भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक स्थिति के हिसाब से निर्णय लेती है लेकिन यह सरकार मात्र केंद्र सरकार की कठपुतली बन के काम कर रही है। डबल इंजन की सरकार केंद्र के नियंत्रण में पंगु होकर रह गई है। जो कि केंद्र के हर फैसले को आंख बंद कर मानने के लिए मजबूर है। सरकार केंद्र के समक्ष हिमाचली हितों को रखने में पूर्णतया नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को मुख्य चुनावी मुद्दा बना कर सत्ता में आई इस सरकार के राज में कानून व्यवस्था के हाल-बेहाल हैं। चिट्टा माफियोंं, ड्रग माफियोंं ने पूरे हिमाचल को अपने शिकंजे में जकड़ रखा है। गुडिय़ा कांड, होशियार सिंह मर्डर के नाम पर वोट लेने वाली सरकार आजतक उनके कातिलों का पता नही लगा पाई है। राणा ने कहा कि सरकार के यह तीन साल हिमाचल के इतिहास के सबसे खराब साल रहे हैं। बेहतर होता कि सरकार झूठे प्रचार की बजाय प्रदेश की जनता से माफी मांगती। कोरोना काल में हुई हजारों लोगों की मौतों व सड़़क पर ठिठुर रहे किसानों की दुर्दशा से बेखबर सरकार अगर जश्न में विश्वास कर रही है तो यह जनता की भावनाओं पर कुठाराघात करने जैसा है। जिसके लिए जनता बीजेपी को कतई माफ नहीं करेगी।