दयाल पुरुष संत दर्शन सिंह जी महाराज प्रभु प्रेम के मसीहा-  संत राजिंदर सिंह

दयाल पुरुष संत दर्शन सिंह जी महाराज प्रभु प्रेम के मसीहा- संत राजिंदर सिंह

अमृतसर, ( राहुल सोनी )

 

सावन कृपाल रूहानी मिशन की शाखा की ओर से में दयाल पुरुष संत दर्शन सिंह जी महाराज के 34वें बरसी भंडारे पर एकत्रित भाई-बहनों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सावन कृपाल रूहानी मिशन के वर्तमान अध्यक्ष संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने अपने विडियो सत्संग में कहा कि, ”दयाल पुरुष संत दर्शन सिंह जी महाराज ने अपनी ज़िंदगी के जीते-जागते उदाहरण के द्वारा सभी को अध्यात्म और ध्यान-अभ्यास के मार्ग पर चलाया। वे प्रभु-प्रेम, दया और करुणा के मसीहा थे। उन्होंने हमारे अंदर छुपे हुए प्रभु-प्रेम को जागृत किया और लाखों भाई-बहनों को अंधकार से भरी ज़िंदगी से निकालकर प्रभु की चेतनता, प्रकाश व प्रेम की ओर ले गए। उन्होंने कहा कि

संत दर्शन सिंह जी महाराज अक्सर कहा करते थे कि यह मानव चोला एक सुनहरा अवसर है अपने आपको जानने और पिता-परमेश्वर को पाने के लिए। उन्होंने ध्यान-अभ्यास के द्वारा हमें अंदर के रूहानी खजानों का अनुभव कराते हुए पिता-परमेश्वर के साथ एकमेक किया।

संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कहा कि आज से 34 साल पहले संत दर्शन सिंह जी महाराज शारीरिक रूप से इस धरती को छोड़कर चले गए लेकिन आज भी उनकी शिक्षाएं और प्रेम सदा-सदा के लिए हमारे साथ हैं। उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में ढालते हुए हम अपनी ज़िंदगी के उद्देश्य को पूरा करें।

इस अवसर पर बहुत से लोगों ने उनकी याद में दयाल पुरुष संत दर्शन सिंह जी महाराज के साथ बीते अपने रूहानी अनुभवों को बताया। मिशन की शाखा की ओर से गर्मी की इस तपती धूप में संत दर्शन सिंह जी महाराज की प्यार भरी याद में शहर के प्रमुख स्थानों पर मिशन के सेवादारों द्वारा लोगों की सेवा में ठंडे व मीठे पानी की छबील का भी आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि

संत दर्शन सिंह जी महाराज ने अपने गुरु हजूर बाबा सावन सिंह जी महाराज व परम संत कृपाल सिंह जी महाराज के नाम पर सन् 1974 में सावन कृपाल रूहानी मिशन की स्थापना की। वे अपने समय के महान सूफी-संत शायर रहे हैं जिसके लिए 1989 में उन्हें ऊर्दू अकादमी दिल्ली, पंजाब व उत्तर प्रदेश द्वारा सम्मानित किया गया। उन्होंने रूहानियत को ‘सकारात्मक अध्यात्म’ के रूप में पेश किया। उनके अनुसार पिता-परमेश्वर को पाना सिर्फ ऋषि-मुनियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि हर इंसान का जन्मसिद्ध अधिकार है। हममें से प्रत्येक व्यक्ति यह अनुभव ध्यान-अभ्यास के द्वारा कर सकता है।

संत दर्शन सिंह जी महाराज के महासमाधि में लीन होने के पश्चात उनके रूहानी कार्यभार को संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने संभाला और आज वे उनके द्वारा दी गई संत-मत की शिक्षा को संपूर्ण विश्वभर में फैला रहे हैं।

सावन कृपाल रूहानी मिशन के अध्यक्ष संत राजिन्दर सिंह महाराज आज संपूर्ण विश्व में ध्यान-अभ्यास द्वारा प्रेम, एकता व शांति का संदेश प्रसारित कर रहे हैं, जिसके फलस्वरूप उन्हें विभिन्न देशों द्वारा अनेक शांति पुरस्कारों व सम्मानों के साथ-साथ पाँच डॉक्टरेट की उपाधियों से भी सम्मानित किया जा चुका है।

सावन कृपाल रूहानी मिशन के संपूर्ण विश्व में लगभग 3200 से अधिक केन्द्र स्थापित हैं तथा मिशन का साहित्य विश्व की 55 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है। इसका मुख्यालय विजय नगर, दिल्ली में है तथा अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय नेपरविले, अमेरिका में स्थित है।

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