भूजल स्तर की कमी को दूर करने के लिए वर्षा जल संग्रहण पर फोकस

भूजल स्तर की कमी को दूर करने के लिए वर्षा जल संग्रहण पर फोकस

भूजल स्तर की कमी को दूर करने के लिए वर्षा जल संग्रहण पर फोकस

धर्मशाला, 06 नवंबर। कांगड़ा जिला में भूजल स्तर की कमी को दूर करने के लिए वर्षा जल संग्रहण पर विशेष फोकस किया जाएगा। उपायुक्त डा निपुण जिंदल ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिले में भूजल स्तर की कमी वाले क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण ढांचे तथा चैक डैम निर्मित करने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे।

डा जिंदल ने कहा कि जिले में ग्रामीण विकास विभाग, कृषि विभाग, जल शक्ति विभाग तथा वन विभाग के माध्यम से निर्मित जल संग्रहण ढांचों की सूची तैयार की जाएगी। ताकि इन जल संग्रहण ढांचों का उचित रखरखाव सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि कैच द रेन अभियान के तहत जल संरक्षण के लिए प्लान तैयार किया गया है। इसके लिए ब्लाक स्तर तथा पंचायत स्तर पर टास्क फोर्स भी गठित की गई है।

डा जिंदल ने कहा कि भीषण गर्मी के समय समस्त क्षेत्रों में खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जल की कमी हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए वर्षा जल संग्रहण पर विशेष बल दिया गया है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार की ओर से अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबोें का संरक्षण तथा सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। इससे जल स्तर में भी बढ़ोतरी होगी तथा अमृत सरोवरों के जल का उपयोग कृषि तथा पशु पालन कार्यों में किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भी सिंचाई के लिए वर्षा जल संग्रहण के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। विभिन्न स्तरों पर जल भंडारण टैंक निर्मित करने के दिशा निर्देश दिए गए हैं।

डा जिंदल ने कहा कि मनरेगा के तहत वर्षा जल संग्रहण के लिए निर्मित किए जाने वाले ढांचों या चैक डैम के लिए बेहतर डिजाइन तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सभी सरकारी संस्थानों में वर्षा जल संग्रहण ढांचे विकसित किए जाएंगे। इसके लिए प्रारंभिक तौर पर धर्मशाला डीसी कार्यालय परिसर में वर्षा जल संग्रहण ढांचा विकसित किया जाएगा। इससे फायर हाइड्रेंट के लिए भी पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने का प्लान तैयार किया जाएगा।

डा जिंदल ने कहा कि चरणबद्व तरीके से सभी सरकारी कार्यालयों में प्राथमिकता के आधार पर जल संग्रहण ढांचे विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कैच दे रेन अभियान के तहत देहरा, पालमपुर, ज्वालाजी तथा इंजीनियरिंग कालेज मस्सल, टांडा मेडिकल कालेज के लिए जल शक्ति विभाग के माध्यम से योजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

उन्होंने कहा कि वर्षा जल संग्रहण से जल की कमी की समस्या का समाधान हो सकेगा। पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा जल का प्रवाह अत्यधिक होने से अधिकांश जल बहकर नदीं-नालों में चला जाता है। इससे मृदा कटाव भी होता है। लेकिन इस तरह के अमृत सरोवरों का निर्माण किए जाने से वर्षा जल को अधिक से अधिक मात्रा में संग्रहित किया जा सकता है। जिससे अधिकाधिक क्षेत्र की सिंचाई करते हुए किसानों व बागवानों द्वारा अधिक उत्पादन भी प्राप्त किया जा सकता है।

विस्तारित विवरण:

  • उपायुक्त डा निपुण जिंदल ने सोमवार को धर्मशाला में कैच द रेन अभियान की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
  • बैठक में वर्षा जल संग्रहण के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा की गई।
  • उपायुक्त ने निर्देश दिए कि भूजल स्तर की कमी वाले क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण ढांचे तथा चैक डैम निर्मित किए जाएं।
  • उन्होंने कहा कि सभी सरकारी संस्थानों में भी वर्षा जल संग्रहण ढांचे विकसित किए जाएंगे।
  • उपायुक्त ने कहा कि वर्षा जल संग्रहण से जल की कमी की समस्या का समाधान हो सकेगा।

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