शिमला/कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के रागी गांव में भूमि सीमांकन के दौरान उस समय तनावपूर्ण हालात पैदा हो गए, जब राजस्व विभाग की टीम पर कथित तौर पर हमला कर दिया गया। इस घटना में एक पटवारी गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए कुल्लू जोनल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद प्रशासनिक अमले में आक्रोश और चिंता का माहौल है, जबकि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजस्व विभाग की एक टीम शुक्रवार को रागी गांव में कथित अतिक्रमण की शिकायतों के बाद भूमि की पैमाइश और सीमांकन के लिए पहुंची थी। इस टीम में पटवारी, कानूनगो और अन्य राजस्व कर्मचारी शामिल थे। बताया जा रहा है कि जैसे ही टीम ने मौके पर जमीन की नाप-जोख शुरू की, कुछ स्थानीय लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों और शिकायत में दर्ज विवरण के अनुसार, विरोध जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि कुछ लोगों ने राजस्व अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की की और लाठियों से हमला कर दिया। इस दौरान पटवारी भूप सिंह के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि टीम को अपनी जान बचाने के लिए मौके से पीछे हटना पड़ा।
घायल पटवारी को तत्काल कुल्लू जोनल अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, उसके सिर और चेहरे पर गहरी चोटें हैं, हालांकि उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी हरकत में आए और मौके पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया।
इस मामले को लेकर पीड़ित पटवारी की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जब टीम सरकारी आदेशों के तहत भूमि सीमांकन का कार्य कर रही थी, उसी दौरान कुछ लोगों ने जान से मारने की धमकी दी और सरकारी काम में बाधा पहुंचाई। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की पहचान की जा रही है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए भाजपा नेता और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर भी घायल अधिकारी का हालचाल जानने कुल्लू जोनल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में डॉक्टरों और पीड़ित परिवार से बातचीत की और इस घटना की कड़ी निंदा की। जय राम ठाकुर ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और सरकारी कर्मचारियों पर इस तरह के हमले लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि राजस्व अधिकारी सरकारी निर्देशों के अनुसार अपना काम कर रहे हैं, तो उन पर हमला किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
वहीं, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि रागी गांव में लंबे समय से भूमि विवाद और अतिक्रमण को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजा गया था। अधिकारियों का कहना है कि सीमांकन का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड को स्पष्ट करना और कानूनी स्थिति का निर्धारण करना था, न कि किसी को नुकसान पहुंचाना।
इस घटना ने एक बार फिर राज्य में सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा और भूमि विवादों की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। राजस्व कर्मचारियों के संगठनों ने भी इस हमले पर गहरी चिंता व्यक्त की है और सरकार से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। रागी गांव और आसपास के क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।






