नई दिल्ली: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से अलग-अलग महत्वपूर्ण बैठकें कर हिमाचल प्रदेश के हवाई और सड़क ढांचे को सुदृढ़ करने से जुड़े अहम मुद्दे उठाए। इन बैठकों को प्रदेश के आधारभूत ढांचे और पर्यटन विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री से हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए विशेष केंद्रीय सहायता और सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और राज्य सरकार इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं पर काम कर रही है। इसके लिए हवाई अड्डे का विस्तार और भूमि से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कम दृश्यता की स्थिति में भी उड़ानों के संचालन को सुनिश्चित करने के लिए विशेष विजुअल फ्लाइट रूल्स लागू करने की मांग की। उन्होंने न्यूनतम दृश्यता सीमा को मौजूदा 5 किलोमीटर से घटाकर 2.5 किलोमीटर करने का आग्रह किया, ताकि मौसम की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उड़ान सेवाएं बाधित न हों।
इसके साथ ही उन्होंने कम यात्री संख्या और सीमित उड़ान संचालन को ध्यान में रखते हुए कुल्लू और शिमला हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था सीआईएसएफ के स्थान पर राज्य पुलिस को सौंपने का प्रस्ताव रखा, जिससे राज्य पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम हो सके। मुख्यमंत्री ने शिमला हवाई अड्डे पर उड़ानों का समय बढ़ाकर सायं 4 बजे तक करने की भी मांग की, ताकि उड़ानों की संख्या में वृद्धि हो और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके। उन्होंने चंडीगढ़-शिमला और शिमला-चंडीगढ़ उड़ानों की आवृत्ति बढ़ाने तथा प्रदेश में प्रस्तावित चार हेलीपोर्ट को शीघ्र स्वीकृति देने का भी आग्रह किया।
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार को लेकर संबंधित विभागों के साथ संयुक्त बैठक कर डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए और राज्य सरकार को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भेंट कर प्रदेश में सड़क अवसंरचना को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने सड़कों और पुलों की मरम्मत, रखरखाव और उन्नयन के लिए पर्याप्त केंद्रीय सहायता की मांग रखी।
बैठक में केंद्रीय मंत्री ने सीआरआईएफ के अंतर्गत छैला-नेरीपुल-यशवंत नगर-ओच्छघाट सड़क परियोजना के लिए सैद्धांतिक रूप से 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। इस सड़क के सुदृढ़ होने से प्रदेश के सेब उत्पादकों और ग्रामीण क्षेत्रों को बड़े स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने शिमला-मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग की प्रगति की जानकारी देते हुए कहा कि यह मार्ग राजधानी शिमला को आठ जिलों और पड़ोसी राज्यों से जोड़ता है। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील भौगोलिक और भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शिमला से शालाघाट और भगेड़ से हमीरपुर तक अधिक संख्या में सुरंगों के निर्माण की मांग की।
उन्होंने पैकेज-4 के तहत फोरलेन निर्माण के लिए डीपीआर प्रक्रिया में तेजी लाने का भी आग्रह किया, जिसमें हमीरपुर बाईपास से भंगबार तक का हिस्सा और नया उत्तरी हमीरपुर बाईपास शामिल है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले मानसून में चीलबाहल से पक्का भरोह खंड में भारी नुकसान हुआ है और पिछले कई वर्षों से इस सड़क का समुचित सुदृढ़ीकरण नहीं हो पाया है। यह मार्ग कई प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच का अहम साधन है।
उन्होंने एनएच-03 के चीलबाहल से पक्का भरोह खंड को विकास और रखरखाव कार्यों के लिए हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के एनएच विंग को सौंपने तथा इसके लिए 38.37 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री ने इस राशि को मंजूरी देते हुए राज्य सरकार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
इन दोनों बैठकों में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह भी उपस्थित रहे। इन उच्चस्तरीय चर्चाओं को हिमाचल प्रदेश के हवाई संपर्क, सड़क नेटवर्क, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।






