समावेशन के लिए सहायक प्रौद्योगिकी: भारत का दृष्टिकोण और क्षमता

समावेशन के लिए सहायक प्रौद्योगिकी: भारत का दृष्टिकोण और क्षमता

लेखकराजेश अग्रवाल

सहायक प्रौद्योगिकी (एटी) अर्थात ऐसा कोई भी उत्पाद या सेवा, जिसके माध्यम से दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडी) अथवा इस तरह की किसी भी स्वास्थ्य स्थितियों का सामना कर रहे लोगों को मुख्यधारा में शामिल होने और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए दैनिक गतिविधियों का निर्वहन करने में सहायता की जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ द्वारा मई 2022 में सहायक प्रौद्योगिकी पर जारी की गई पहली वैश्विक रिपोर्ट (जीआरईएटी) के अनुसार, दुनिया में 2.5 बिलियन से अधिक लोगों को एक अथवा अधिक सहायक उत्पादों की आवश्यकता होती है। भारत में, 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 26.8 मिलियन लोग दिव्यांग हैं और यह उनके लिए सहायक प्रौद्योगिकी की आवश्यकता को दर्शाता है।

भारत में दिव्यांगजनों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य देखभाल तक सीमित पहुंच शामिल है। इसके अलावा, कई दिव्यांगजन पहुंच की कमी के कारण परिवहन और आवास जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुंचने बनाने के लिए भी संघर्ष करते हैं। सहायक प्रौद्योगिकी दिव्यांगजनों को रोजमर्रा के काम करने और उनके समुदायों में समान रूप से भागीदारी करने में मदद करते हुए इन चुनौतियों का समाधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत एक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम, भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को) का उद्देश्य दिव्यांगजनों को गुणवत्तापूर्ण सहायक उपकरण और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करना है। पिछले कुछ वर्षों में, एलिम्को भारत में एटी के क्षेत्र में एक प्रमुख भागीदार बन चुका है। एलिम्को सहायक उपकरणों की विस्तृत श्रृंखला का निर्माण करता है, जिसमें प्रोस्थेसिस, ऑर्थोसिस, श्रवण यंत्र और गतिशीलता सहायक उपकरण जैसे ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर, स्टिक, वॉकर, बैसाखी आदि शामिल हैं।

एलिम्को ने दुनिया भर में प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी सहायता और सहायक उपकरणों का उत्पादन करने हेतु अपनी सुविधाओं का आधुनिकीकरण करने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। इस दिशा में, एलिम्को ने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सहयोग किया और लोअर लिम्ब प्रोस्थेटिक कंपोनेंट (कृत्रिम पैर) और सक्रिय व्हील चेयर के स्वदेशी निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए टीओटी पर हस्ताक्षर किए। प्रोस्थेटिक्स के लिए एलिम्को द्वारा निर्मित “परिवर्तन किट” का मूल्य इस श्रेणी में आयातित प्रोस्थेसिस की तुलना में बेहद कम है, जिसे देश भर में हजारों लाभार्थियों को लगाया गया है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत दृष्टिबाधित दिव्यांगों के लिए स्वदेशी डिजाइन से निर्मित ‘सुगम्य’ छड़ी की परिकल्पना की गई है।

प्रौद्योगिकी ग्रहण करने की दिशा में एलिम्को द्वारा किए गए प्रयासों में अत्याधुनिक प्रोस्थेटिक और ऑर्थोटिक केंद्र; उन्नत डिज़ाइन दक्षता के साथ- 3डी मॉडलिंग और विश्लेषण सॉफ़्टवेयर; 3डी प्रिंटिंग सहित कंप्यूटर एडेड डिजाइनिंग (सीएडी) और कंप्यूटर एडेड मैन्युफैक्चरिंग (सीएएम); सीएनसी स्लाइडिंग हेड मशीन और सीएनसी टर्न मिल मशीन का उपयोग; सटीक/सटीक धातु विश्लेषण के लिए- स्पेक्ट्रो विश्लेषक; बैटरी चालित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल में रिवर्स ड्राइव और डिस्क ब्रेक और एक्टिव फोल्डिंग व्हील चेयर तथा रफ टेरेन व्हील चेयर का डिजाइन/ड्राइंग जैसी नई सुविधाएँ शामिल की गई हैं।

दिव्यांगजनों के लिए सार्वजनिक स्थलों और परिवहन प्रणालियों को अधिक सुलभ बनाने के लिए सरकार द्वारा 2015 में सुगम्य भारत अभियान का शुभारंभ किया गया था और यह दिव्यांगजनों के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी को अधिक सुलभ बनाने पर केंद्रित है।

कौशल विकास के लिए 2015 में शुभारंभ की गई राष्ट्रीय कार्य योजना का लक्ष्य 2022 तक दस लाख दिव्यांगजनों को प्रशिक्षण प्रदान करना है, जिसमें दिव्यांगजनों को उनके कौशल विकसित करने में सहायता करने के लिए एटी प्रदान करने का प्रावधान है।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) की सहायता/उपकरणों की खरीद/फिटिंग के लिए दिव्यांगजन को सहायता (एडीआईपी) योजना दिव्यांगजनों को सहायक उपकरणों और अन्य उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है और यह सबसे लोकप्रिय भी है तथा जरूरतमंद दिव्यांगजनों को निःशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए इसमें देश के सभी जिले शामिल हैं।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) के तहत विभाग द्वारा देश भर में नौ राष्ट्रीय संस्थान स्थापित किए गए हैं, साथ ही राष्ट्रीय संस्थानों की विस्तारित शाखाओं के रूप में 21 समग्र क्षेत्रीय केंद्र (सीआरसी) भी स्थापित किए गए हैं।

भारत दिव्यांगजनों के लिए एटी समाधान विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करने वाले स्टार्ट-अप में वृद्धि का साक्षी बन रहा है, जो दिव्यांगजनों के लिए नवीन उत्पाद बनाने हेतु नवीनतम तकनीक का लाभ उठा रहे हैं। यह भारत सरकार के समर्थन से समावेशन को बढ़ावा देने और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में सहायता कर सकते हैं।

आज, एटी दिव्यांगजनों के लिए विश्व मंच पर चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय है, जो दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाने पर केंद्रित एक वैश्विक कार्यक्रम है। कुल मिलाकर, भारत में दिव्यांग्ता क्षेत्र में सहायक प्रौद्योगिकी का व्यापक दायरा महत्वपूर्ण है और इस क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने वाले स्टार्ट-अप और इनोवेटर्स का एक बढ़ता हुआ इकोसिस्टम भी है। सरकार ने समावेशन को बढ़ावा देने और दिव्यांगजनों के जीवन में सुधार लाने में एटी समाधानों की क्षमता को पहचाना है और सरकार एटी समाधानों के विकास, इन्हें अपनाने और इनके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। निरंतर निवेश और समर्थन के साथ, एटी समाधानों के विकास और इन्हें अपनाने के मामले में भारत वैश्विक रूप से प्रमुख बनने की क्षमता रखता है।

*लेखक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव हैं।

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