वाल्वुलर हृदय रोग भारत में मृत्यु का नंबर 3 कारण - डा.कपूर 

अमृतसर,( राहुल सोनी  ) सडन कार्डियक अरेस्ट को हृदय संबंधी विकारों के कारणों से होने वाली प्राकृतिक मृत्यु के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो लक्षणों की शुरुआत के एक घंटे के भीतर चेतना के अचानक जाने से शुरू होती है। पंजाब रतन पुरस्कार विजेता और मेदांता अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग में वाइस चेयरमैन डॉ रजनीश कपूर द्वारा एक मेटा-विश्लेषण अध्ययन से पता चला है कि  एओर्टिक (मुख्य रक्तवाहिका) स्टेनोसिस के रोगियों में , जो एओर्टिक वाल्व का संकुचन है, अचानक मृत्यु की घटनाओं को 37 प्रतिशत तक नोट किया गया था।
शुक्रवार को अमृतसर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, डॉ कपूर ने मेटा-विश्लेषण का विवरण साझा करते हुए कहा कि हृदय रोग में वाल्वुलर हृदय रोग भारत में मृत्यु का नंबर 3 कारण है। हमारे ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व रिप्लेसमेंट (टीएवीआर) रजिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, एओर्टिक स्टेनोसिस रोग वाले 70 प्रतिशत रोगी 60 वर्ष से कम आयु वर्ग के थे और 20-30 प्रतिशत रोगी 50 वर्ष से कम आयु के थे।
उन्होंने आगे बताया कि हार्ट वाल्व का कार्य रक्त प्रवाह को उचित दिशा में बनाए रखना है। यदि ये वाल्व खराब हो जाते हैं तो रक्त का असामान्य प्रवाह होता है , जिससे ब्रेन स्ट्रोक, खतरनाक रूप से दिल की धीमी धडक़न, दिल की कार्यप्रणाली में कमी, दिल का आकार बढऩा व दिल का दौरा पढऩे जैसी स्थितियां पैदा होती हैं । ये सभी स्थितियां दिल की विफलता का कारण बन सकती हैं जो जीवन के लिए खतरा है।
मेटा-विश्लेषण में, 7 बड़े अध्ययनों और 4000 रोगियों से यह देखा गया कि एओर्टिक स्टेनोसिस के लक्षणों वाले रोगियों में अचानक मृत्यु की व्यापकता 37 प्रतिशत थी, जबकि बिना लक्षण वाले रोगियों में यह लगभग 1 प्रतिशत थी।
डॉ कपूर बतातें है, एओर्टिक स्टेनोसिस का समय पर उपचार अचानक मृत्यु के जोखिम को 95 प्रतिशत तक रोकने में मदद कर सकता है। पहले सर्जिकल एओर्टिक वॉल्व रिप्लेसमेंट (एसएवीआर) मुख्य उपचार था, लेकिन अब टीएवीआर पसंदीदा विकल्प है, खासकर बुजुर्ग आबादी में। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह रोगियों को ओपन हार्ट सर्जरी और इसकी जटिलताओं जैसे कि उपचार के बाद के संक्रमण के जोखिम, लंबे समय तक अस्पताल में रहने और ऑपरेशन के बाद अस्थायी विकलांगता से बचाता है। उन्होंने कहा टीएवीआर अनिवार्य रूप से उन रोगियों में संकेत किया जाता है जो सर्जरी के लिए अयोग्य हैं और 85 वर्ष से अधिक के हैं।
हृदय रोगियों को हृदय वाल्व रोग के लक्षणों सांस फूलना, सीने में दर्द, तेज़ धडक़न, चक्कर आना, थोड़ी दूर तक चलने में कठिनाई, टखनों में सूजन और नींद की समस्या को नजऱअंदाज नहीं करना चाहिए । समय पर इलाज से जान बचाई जा सकती है। हमारे पास टीएवीआर प्रक्रिया के माध्यम से 98 प्रतिशत सफलता दर और 100 प्रतिशत वाल्व डिप्लॉयमेंट (परिनियोजन) रिकॉर्ड  है। हमने उन रोगियों की तुलना में हृदय रोग से मृत्यु के जोखिम को 280 प्रतिशत कम देखा है जिनका इलाज एओर्टिक स्टेनोसिस के लिए किया गया है,