डा.ओबराए के प्रयासों से 24 वर्षीय चाहतबीर का पार्थिव शव दुबई से वतन पहुँचा ।

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डा.ओबराए के प्रयासों से 24 वर्षीय चाहतबीर का पार्थिव शव दुबई से वतन पहुँचा ।

सरबत का भला ट्रस्ट ने अब तक 246 बदनसीबों के पार्थिव शव परिजनों तक पहुंचाएं
 
अमृतसर, ( राहुल सोनी  )  खाड़ी मुल्कों में काम करने वाले लोगों की हर मुश्किल घड़ी में रहबर बन मदद करने वाले दुबई के प्रसिद्ध कारोबारी व सरबत का भला चैरिटेबल ट्रस्ट के सरप्रस्त डा.एस.पी.सिंह ओबराए के प्रयासों से तरनतारन जिले के गांव सरहाली कलां के 24 वर्षीय युवक चाहतबीर सिंह पुत्र स्व सुखबीर सिंह का पार्थिव शव मौत से करीब 18 दिनों बाद गत देर रात दुबई से श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा राजासांसी, अमृतसर पहुंचा। यह 
 जानकारी सरबत का भला चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक डा.एस.पी.सिंह ओबराए ने बताया कि चाहतबीर सिंह तरनतारन जिले की एक विधवा अध्यापिका का इकलौता पुत्र था। वह दिसंबर 2020 को अपने बढ़िया भविष्य की आशा लेकर दुबई में काम करने के लिए आया था, परन्तु गत 19 जुलाई को अचानक किसी कारण उस की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि मृतक के पारिवारिक सदस्यों की तरफ से की गई बड़ी कोशिशों के बाद जब वह चाहतबीर का पार्थिव शव वापिस भारत लाने में सफल नहीं हुए तो उन्होंने ट्रस्ट की अमृतसर इकाई द्वारा उन के साथ संपर्क कर अपनी बेबसी का हवाला देते मृतक शव को भारत पहुंचाने में सहयोग करने के लिए कहा था। जिस उपरांत उन्होंने भारतीय दूतावास के विशेष सहयोग सदका अपने निजी सचिव बलदीप सिंह चाहल की देख-रेख में जल्द सारी जरूरी कागज़ी कार्रवाई मुकम्मल करवा कर चाहतबीर के पार्थिव शव को गत देर रात भारत भेज कर उस के परिजनों को सौम्प दिया है। उनहोंने यह भी बताया कि पीडित परिवार के आर्थिक पक्ष से समर्थ होने के कारण चाहतबीर के पार्थिव शव को भारत भेजने पर हुआ ख़र्च उसके परिवार ने ही किया है। 
   गौरतलब है कि डा. ओबराए के प्रयासों से अब तक 246 बदनसीब लोगों के पार्थिव शव उन के वारिसों तक पहुंचाएं जा चुके हैं। 
    हवाई अड्डे से पार्थिव शव लेने के लिए पहुंचे चाहतबीर सिंह के मौसा सुक्ख सिमरतपाल सिंह, चाचा प्रदीप सिंह और दूसरे पारिवारिक सदस्यों के अलावा मास्टर गुरविन्दर सिंह बब्बू पट्टी और गुरिन्दर सिंह जौहल अन्य ने उसका पार्थिव शव लेकर आने के लिए बड़ा सहयोग करने पर डा.एस.पी.सिंह ओबराए का तह दिल से शुकराना करते कहा कि उनके सहयोग सदका ही चाहतबीर की अंतिम रस्मे उसके पैतृक गांव में होनी संभव हुई हैं। बता दे कि सुबह 9 बजे के करीब चाहतबीर का अंतिम ससकार उसके पैतृक गांव सरहाली कलां में कर दिया गया है।