हिमाचल प्रदेश में हॉकी की हकीकत चंबा में दो राष्ट्रीय खिलाड़ी फ्राई कर रहे हैं मछली तीसरा चला रहा है ढाबा


 

हिमाचल प्रदेश में हॉकी की हकीकत चंबा में दो राष्ट्रीय खिलाड़ी फ्राई कर रहे हैं मछली तीसरा चला रहा है ढाबा

चंबा :बॉबी सिंह, 

हिमाचल प्रदेश में हॉकी की हकीकत चंबा में दो राष्ट्रीय खिलाड़ी फ्राई कर रहे हैं मछली, तीसरा चला रहा है ढाबा ,आठ बार हॉकी का नेशनल खेला अब रोजी-रोटी के लिए  2 खिलाड़ी तल रहे हैं मछली, तीसरा चला रहा ढाबा ,गुमनामी के अंधेरे में खो गए हैं यह राष्ट्रीय खिलाडी ।

देश के दिग्गज हॉकी खिलाड़ी धनराज पिल्लै के खिलाफ खेल चुके विश्वजीत मेहरा गुमनामी का जीवन काट रहे हैं. वहीं, इनके भाई संजीव मेहरा भी नेशनल खिलाड़ी रह चुके हैं. आज खेल ने इनको नजरअंदाज कर दिया है. जिसमें दोनों भाई मछली बेचने को मजबूर हैं. चंबा के एक और हॉकी खिलाड़ी हैं  केवल मेहरा आज खेल फेडरेशन की लापरवाही से ढाबा चलाकर  रोजी-रोटी का गुजर बस कर रहे हैं.

गुमनामी के अंधेरे में खो गए हैं। देश में राष्ट्रीय खिलाडियों  की  एक असलियत यह भी है कि खेल में खून-पसीना बहाने वाले राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी आज भी उपेक्षित हैं। कोई मछली तल रहा है तो कोई ढाबा चलाकर गुजर-बसर करने को मजबूर है। विश्वजीत मेहरा का कहना है कि वह पांच बार नेशनल टीम में रहे। दिल्ली, लखनऊ, मुंबई, मद्रास और जम्मू में 1987 से लेकर 1991 तक टीम में शामिल रहे। इस दौरान सबसे खास पल धनराज पिल्ले और परगट सिंह के खिलाफ खेलने का रहा।