व्यतिपात योग का प्रभाव और महिमा

Breaking News

व्यतिपात योग का प्रभाव और महिमा

व्यतिपात योग

 

विशेष 18 जून 2021 शुक्रवार को प्रातः 05:04 से 19 जून, शनिवार को रात्रि 02:47 तक

( यानी 18 जून, शुक्रवार को पूरा दिन ) व्यतीपात योग है।

 

व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।

 

वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।

 

व्यतिपात योग माने क्या कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुऐ नाराज हुऐ, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नही थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।

 

ज्योतिष शास्त्र में योग का अपना अलग ही महत्व है यदि योग शुभ परिणाम देने वाला है तो निश्चित ही शुभ फल देगा और यदि अशुभ फल देने वाला है तो अशुभ परिणाम देगा। इसी कड़ी में  व्यतिपात नामक एक योग है जिसका गुणगान वाराह पुराण में किया गया है। कहा जाता है की इस योग में प्राणायम, जप, पाठ, मानसिक जप, मंत्रो का उच्चारण इत्यादि करने से जातक के ऊपर ईश्वर की विशेष अनुकम्पा की प्राप्ति होती है। ऐसा करने से भगवान् सूर्यनारायण प्रसन्न होते है। ऐसा लोक विश्रुत है कि व्यतिपात योग में जप करने वाले भक्त को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

 

व्यतिपात योग केवल गुरु भक्ति तथा सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए किये गए जप, तप, पाठ तथा मानसिक स्मरण आदि के लिए ही शुभ है अन्य शुभ कार्यो के लिए नहीं।

 

 

व्यतिपात योग का प्रभाव क्षेत्र

व्यतिपात योग ( Vyatipata Yoga ) का प्रभाव सभी राशियों पर किसी न किसी रूप में पड़ता है। इस योग में नौकरी, बिजनेस या अन्य तरह के कार्यक्षेत्र में उथुल-पुथल मच जाती है। नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए कुछ जरूरी कामों में व्यवधान आती है।

इस समय बिजनेस करने वालों की भी टेंशन बढ़ जाती है अतः इस समय में कस्टमर से बहुत ही संभलकर व्यापारिक समझौता करनी चाहिए अन्यथा बनता हुआ काम बिगड़ सकता है। इस काल में कोई भी बड़ा निर्णय लेने से बचना चाहिए यदि ऐसा नहीं करते है तो निश्चित ही मनोनुकूल परिणाम नही मिलेगा।