मुख्यमंत्री पंजाबियों को बताएं कि आप पंजाब के आधे हिस्से पर बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के केंद्रीय प्रस्ताव पर क्यों सहमत हुए: सरदार सुखबीर सिंह बादल

मुख्यमंत्री पंजाबियों को बताएं कि आप पंजाब के आधे हिस्से पर बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के केंद्रीय प्रस्ताव पर क्यों सहमत हुए: सरदार सुखबीर सिंह बादल

शिअद-बसपा गठबंधन के सत्ता में आने के बाद दोआबा क्षेत्र में भगवान वाल्मीकि की स्मृति में विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा--सुखबीर बादल
 
रामतीर्थ (अमृतसर)/17अक्टूबर (राहुल सोनी )  शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज कहा है कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाबियों को बताना चाहिए कि उन्होने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के दौरान लगभग आधे राज्य को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के हवाले करने पर सहमति देकर विस्तार करना क्यों स्वीकार किया है। यहां भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल पर उनके प्रगट दिवस  के उपलक्ष्य में हुए एक कार्यक्रम में नतमस्तक होने के बाद यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि यह सच है कि मुख्यमंत्री ने 5 अक्टूबर को गृहमंत्री से मुलाकात की , जिसके बाद राज्य के दस जिलों में बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को तलाशी, वसूली और गिरफ्तार करने का अधिकार दे दिया गया है।
सरदार सुखबीर सिंह बादल ने मुख्यमंत्री को यह कहते हुए कि फोटो सेशन में लिप्त होने से कुछ भी हासिल नही होगा। उन्होने कहा कि ‘‘ पंजाबियों को इस फैसले  से पंजाब पर केंद्रीय राज स्थापित करने करने के फैसले को विफल करने की उम्मीद करते हैं, जोकि संघवाद के सिद्धांतो के  साथ साथ  लोकतंत्र के लोकाचार के खिलाफ है’’। उन्होने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि श्री चन्नी ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नही की है’’।
उन्होने अनुसूचित जाति के मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त करने में अकेले प्रतीकवाद के लिए जाने के लिए  कांग्रेस पार्टी की निंदा की। ‘‘ नेता का इरादा काम करने का होना चाहिए तथा कांग्रेस को उसे काम करने की अनमति देनी चाहिए। वास्तव में ये दोनों चीजें गायब हैं’’।
सिंघु बाॅर्डर की घटना के बारे में पूछे जाने पर उन्होने घटना का बर्बर कृत्य करार दिया, जिसका सभ्य समाज में कोई स्थान नही है। उन्होने पूरी घटना की स्वंतत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
 पिछली अकाली दल नेतृत्व वाली सरकार के समय 250 करोड़ रूपय की लागत से पूरी तरह से बदलाव किए गए  मंदिर के एक विशाल हाॅल में एक विशाल कांफ्रेस को संबोधित करते हुए सरदार बादल ने कहा कि राज्य में एक बार शिअद-बसपा की सरकार बनने के बाद दोआबा क्षेत्र में भगवान वाल्मीकि जी की स्मृति में एक विश्वविद्यालय की स्थापना करेगा। उन्होने कहा कि यह विश्वविद्यालय डाॅ. बी आर अंबेडकर की स्मृति में बनाया जाएगा।
सरदार बादल ने सभी विरासती स्थलों और धार्मिक जगहों के नियमित रखरखाव के लिए एक विशेष कमेटी गठित करने की घोषणा की है। उन्होने कहा कि दरबार साहिब के पास विरासती गली जैसे विभिन्न प्रतिष्ठित स्थानों की जीर्ण शीर्ष अवस्था को देखते हुए यह बेहद जरूरी है।
 
राज्य के समावेशी विकास के लिए अपने दृष्टिकोण को सांझा करते हुए सरदार बादल ने कहा कि आटा-दाल और शगुन योजनाओं की शुरूआत साहसिक कदम थे, जिसने गरीब से गरीब व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में सुधार कर दिया था। ‘‘ अब हम तकनीकी संस्थानों में समाज के वंचित वर्गों के मेधावी छात्रों को 33 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करके इनको पूरा करेंगें। राज्य उच्च अध्ययन करने के लिए 10 लाख रूपये का सुरक्षित कर्जा छात्रों को प्रदान करेगा’’।
 
पिछली अकाली दल सरकार की उपलब्धियों को सूचीबद्ध करते हुए उन्होने अनुसूचित जाति और पिछड़ी जाति के सदस्यों को पांच पांच लाख घर वितरित करने का भी वादा किया, इसके अलावा पचास फीसदी अनुसूचित जाति की आबादी वाली पंचायतों को विकास कार्यों के लिए 50 लाख रूपये का अनुदान दिया जाएगा।
 
 
 
इससे पहले पूर्व मंत्री स. बिक्रम सिंह मजीठिया ने नवजोत सिद्धू की अभद्र भाषा और राज्य के मामलों में अकारण हस्तक्षेप के लिए फटकार लगाई। उन्होने कहा कि नवजोत सिद्धू के साथ साथ मुख्यमंत्री और जनता दोनों को मुर्ख बनाने की कोशिश करने के बजाय सूची तैयार करनी चाहिए कि वे 2017 में किए गए वादों को कैसे करेंगें। उन्होने कहा कि कांग्रेस सरकार को पूर्ण कर्जा माफी के वादों को पूरा करना चाहिए, प्रत्येक परिवार में नौकरी देने के अलावा वादे के अनुसार सभी समाज कल्याण लाभ योजनाओं में संशोधन करना चाहिए। उन्होने कांग्रेस पार्टी से यह भी बताने को कहा कि उसका मुख्यमंत्री चेहरा कौन था। उन्होने कहा कि कांग्रेस पार्टी में कोई जवाबदेह नही है, इसका कारण यह है कि कांग्रेस के मंत्री और विधायक राज्य के संशाधनो की खुली लूट में लिप्त रहे हैं।
 
वरिष्ठ नेताओं गुलजार सिंह रणीके व अनिल जोशी ने भी सभा को संबोधित किया। वाल्मीकि समाज की विभिन्न धार्मिक हस्तियों ने भी मंच सांझा किया । लखबीर सिंह लोधीनंगल, विरसा सिंह वल्टोहा, प्रकाश चंद गर्ग, पवन टीनू, हरीश राय ढ़ांडा, जगबीर बराड़, गुरप्रताप टिक्का, मोंटू वोहरा और चंदन ग्रेवाल के अलावा विजय दानव, मंजीत मान, मलकीत एआर, अमरपाल अजनाला, तलबीर गिल, वीर सिंह लोपोके, राजकुमार अतिकाय भी मौजूद थे।