वर्षा ऋतु विशेष, वर्षा ऋतु में करने योग्य काम

हिन्दू पंचांग 
 

वर्षा ऋतु विशेष

 
 
अभी वर्षा ऋतु चल रही है | इसे शास्‍त्रीय भाषा में आदानकाल बोलते है | जठराग्नि दुर्बल होती है | वायु, गैस की तकलीफें उभरती हैं  | पित्त संचित होता है | अगर सावधान नहीं रहें तो पित्त व वात मिलकर हार्ट अटैक बना सकता है | इस आदानकाल में कब्जियत न रहे इसका ध्‍यान रखना चाहिए |
 

 

वर्षा ऋतु में करने योग्य काम 

 
पेट साफ़ रहे इसके लिए हरड़ रसायन २ -२ गोली खाना | हरड रसायन , रसायन से बना हुआ टोनिक है । दिनभर खाया हुआ टोनिक बन जायेगा |
 
 
शुद्ध वातावरण व शुद्ध जल का सेवन करना |
 
 
मधुर भोजन, चिकनाईवाला, शरीर को बल देनेवाला भोजन करना चाहिये और दोपहर के भोजन में नींबू, अदरक, सैंधा नमक, लौकी, मैथी, खीरा, तुरई आदि खाने चाहिए |
 
वर्षाऋतु में पानी गरम करके पियें अथवा तो पानी की शुद्धता का ध्यान रखें |
 
वायुप्रकोप से जोडों में दर्द बनने की संभावना है और बुढ़ापे में लकवा मारने की संभावना बढ़ जाती है | भोजन में लहसुन की छौंक लकवे से फाईट करता है |
 
चर्मरोग रक्तविकार आदि बिमारियों की इस ऋतु में संभावना बढ़ जाती है | नींबू, अदरक, गाजर, खीरा स्वास्थ्‍यप्रद रहेगा |*
 
सूर्यकिरण स्नान सभी ऋतुओं में स्वास्थ्‍य के लिए हितकारक है |
 
अश्विनी मुद्रा- श्वांस रोककर योनि संकोच लेना और मन में भगवान का जप करना इस सीज़न की बी‍मारि‍यों को भगाने की एक सुंदर युक्ति है |
 
 
 

वर्षा ऋतु में न करने योग्य काम 

 
गरम, तले हुए, रूखे, बासी, डबल रोटी, आटा लगा हुआ बिस्किट आदि स्वास्थय के लिए इस सीज़न में हितकर नहीं है । फास्ट फ़ूड से बचना चाहिए |
 
 देर रात बारिश के सीज़न में न जागें |
 
 
अधिक श्रम, अधिक व्यायाम न करें |
 
खुले आकाश में सोना खतरे से खाली नहीं है ।
 
ज्यादा देर तक शरीर भीगा हुआ न रखें | सिर गिला हो तो तुरंत पोछ लें।
 
 
भीगे शरीर न सोयें और रात्रि को स्नान न करें | मासिक धर्म आये तो तुरंत स्नान करके सूखे कपडे से अपने को पींछ लें |*