हिमाचली ट्राउट मच्छली से हिमाचल प्रदेश मत्स्य पालन में मानचित्र पर उभरा

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हिमाचली ट्राउट मच्छली से हिमाचल प्रदेश मत्स्य पालन में मानचित्र पर उभरा

डॉक्टर गिरधारी लाल महाजन

लेखक स्वतंत्र  पत्रकार हैं 

 

हिमाचल प्रदेश को देश में अब तक  पर्यटन राज्य या सेब राज्य के रूप में  जाना जाता है लेकिन अब पहाड़ी राज्य  मत्स्य पालन में भी देश के मान चित्र पर अपनी उपस्थिति दर्ज करबा रहा है / राज्य सरकार चालू बित बर्ष में पुर्बोतर  राज्य सिक्किम को ट्राउट मछली के पांच लाख अण्डे प्रदान करेगा जिससे सिक्किम को मछली उत्पादन में आत्म निर्भर बनने में मदद मिलेगी 


हिमाचल प्रदेश का मत्सय विभाग ऊँचे बर्फीले पर्वतीय क्षेत्रों में पैदा की जाने वाली ट्राउट मच्छली के पांच लाख अण्डे सिक्किम सरकार को प्रदान करेगा। इन अण्डों की पहली खेप सिक्किम सरकार  को कुल्लू ज़िला में स्थित बताहार  तथा हामनी हैचरी से प्रदान की गयी है तथा बाकि स्टॉक  चालू बितीय बर्ष में प्रदान कर दिया जायेगा 


इस समय राज्य में सरकारी क्षेत्र में स्थापित पल्लीकुहल, बाराहाट, हामनी, मान्दल, होली, बरोट, सांगला तथा धाममाड़ी में स्थापित हैचरियों के माध्यम से वार्षिक 17 लाख ट्राउट मच्छलियों के अण्डों का उत्पादन किया जा रहा है।


 

 

 

 

 

 

 

 

मच्छली पालन विभाग प्रति वर्ष राज्य के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों के ठण्डे जलाशयों में लगभग 80,000-1,00,00 ब्राउन ट्राउट सीड (फिंगरलिग्स) का भण्डारण करता है।


राज्य में ट्राउट मच्छली उत्पादन की शुरुआत ब्रिटिश काल में वर्ष 1909 में स्पोर्ट्स फिश्रीज़ को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से शुरु किया गया। हिमाचली ट्राउट मच्छली आक्सीज़न से भरपूर बर्फीली नदियों में पैदा होने की वजह से विश्व में सबसे स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट पौष्टिक मच्छली मानी जाती है। प्रदेश में इंडो-नार्वेजियन ट्राउट फार्मिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत से ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में ट्राउट मच्छली का वाणिज्यिक आधार परउत्पादन शुरु किया गया।
 

राज्य के मत्स्य  पालन मंत्री श्री वीरेन्द्र कंवर ने बताया कि  राज्य में मच्छली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्रों को केन्द्रीय प्रायोजित परियोजनाओं के अंर्तगत अनेक प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2017-18 में निजी क्षेत्र में 15 ट्राउट हैचरी, वर्ष 2018-19 में कुल 12 ट्राउट हैचरी स्थापित की गई निजी क्षेत्र में अब तक राज्य में कुल 32 ट्राउट हैचरी स्थापित की गईं हैं जिनमें से कुल्लु(9), मण्डी(9), कांगड़ा(2), चम्बा(5), शिमला(2), किन्नौर(3), सिरमौर(2) हैचरियां लगभग 875 लाख रुपये की लागत से स्थापित की गई हैं ताकि राज्य में ट्राउट मछली के ओवा ( अण्डों ) की मांग को पूरा किया जा सके।


राज्य में वर्ष 2021-22 के दौरान 2.50 करोड़ रुपये निवेश(140 लाख सब्सिडी) से राज्य के सिरमौर, चम्बा किन्नौर और मण्डी ज़िलों में पांच नई हैचरियां स्थापित की जाएंगी।


ट्राउट मच्छली उत्पादन राज्य के बर्फीले क्षेत्रों के किसानों के लिए लाभप्रद व्यवसाय के रुप में उभर रहा है इस समय 600 ट्राउट उत्पादकों द्वारा राज्य में 1200 ट्राउट मच्छली इकाईयां स्थापित की गईं /निजी क्षेत्र में स्थापित हैचरियां राज्य में लगभग एक हज़ार लोगों को रोजगार के साधन उपलब्ध करवा रही है तथा वार्षिक 30 करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियां सृजत कर रही है।


राज्य में विदेशी एंगलरज को आकर्षित करने के लिए कुल्लू, मण्डी, किन्नौर, शिमला तथा चम्बा ज़िलों में एंगलिंग  हट  स्थापित किए गए हैं तथा मत्सय पालन विभाग एंगलिंग प्रतियोगिता का नियमित आयोजन कर रहा है, राज्य में पिछले तीन वर्षों में 10,000 एंगलरज ने एंगलिंग गतिविधियों में हिस्सा लिया। 

इस समय राज्य के 5574 घरों के 12347 पंजीकृत मच्छुआरे 300 मच्छली नौकाओं के माध्यम से सम्मानजनक आजीविका कमा रहे हैं।
नीली क्रान्ति के अन्र्तगत राज्य में एक आईस प्लांट तथा तीन लैंडिंग सैन्टर विकसित किए गए हैं। जबकि प्रधानमंत्री मत्सय सम्पदा योजना के अन्र्तगत मच्छुआरों को कई नई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। वर्ष 2020-2021 में राज्य में 3096.22 लाख रुपये की कीमत की 688.85 मीट्रिक टन ट्राऊट मच्छली का उत्पादन किया गया जबकि वर्ष 2021-2022 वर्ष में 4673.35 लाख रुपये कीमत की 849.70 मीट्रिक ट्राऊट मच्छली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

राज्य में मच्छली उत्पादन के ढांचागत विकास के लिए 29 हैचरी 13 फीड  मिल, 3 रिटेल आऊटलेट, ट्राऊट केज कल्चर विकसित किए जा रहे हैं। राज्य में 3000 किलोमीटर नदीय तट पर मच्छली उत्पादन किया जाता है जिसमें से 600 किलोमटर लम्बे नदीय तट पर ट्राऊट मछली का उत्पादन किया जाता है।
राज्य में ट्राऊट मच्छली उत्पादकों को मत्सय विभाग के आठ विभागीय ट्राऊट फार्म के माध्यम से सस्ती दरों पर गुणवत्ता वाले बीज प्रदान किया जाता है।
इस समय राज्य में 606 परिवार 1198 रेसबेज के माध्यम से ट्राऊट मच्छली का उत्पादन करके अपनी आजीविका कमा रहे हैं। राज्य में इस समय ट्राऊट मच्छली का उत्पादन कुल्लु, मण्डी, कांगड़ा किन्नौर, चम्बा, सिरमौर तथा शिमला जिलों  के ऊँचे  पर्वतीय  स्थलों  में किया जा रहा है तथा इस सफल परीक्षण से विलासपुर, ऊना, हमीरपुर जिलों में भी ट्राऊट मच्छली का उत्पादन किया जा सकेगा।

इस वर्ष राज्य में 632 मीट्रिक टन ट्राउट मच्छली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।