ऋषिकेश --बिश्ब की योग राजधानी

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ऋषिकेश --बिश्ब की योग राजधानी

उत्तराखंड में हिमालय की तलहटी के पास स्थित ऋषिकेश को  “गढ़वाल हिमालय के प्रवेश द्वार भी कहते है,ये हिंदुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थान  होने के साथ, विश्व योग राजधानी  के लिए भी प्रसिद्ध है,गंगा नदी ऋषिकेश शहर से होकर बहती है और ये अपने विभिन्न मंदिरों और योग आश्रमों के लिए प्रसिद्ध है,

डॉक्टर गिरधारी लाल महाजन 

(लेखक स्वतन्त्र पत्रकार हैं)

हिन्दू धर्म के पुराणों में  समुद्र मंथन से जुडी हुई एक पौरणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले हुए  विष को भगवान्  शिव ने इसी स्थान पर पिया था। 

विष पीने के बाद भगवान शिव के कंठ नील पड़  गए, और उसी समय से भगवान  शिव को नीलकंठ के नाम से जाना गया |  विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मण झूले से सम्बंधित एक अन्य कथा के अनुसार,  भगवान राम ने वनवास के दौरान यहाँ के जंगलों में अपना समय व्यतीत किया था, अपने वनवास के समय भगवान् राम को एक बार जब पवित्र गंगा नदी पार करने को आवश्यकता पड़ी  तब उनके छोटे भाई लक्ष्मण ने इस जगह रस्सी से एक पुल  बनाया जिसे आज हम सब लक्ष्मण झूला के नाम से जानते है । 

एक कथा और भी प्रचलित है, यह भी कहा जाता है कि ऋषि रैभ्य ने यहाँ ईश्वर के दर्शन के लिए बड़ी ही कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान हृषीकेश के रूप में इस जगह प्रकट हुए ऋषि रैभ्य को दर्शन दिए उसी समय से इस स्थान को ऋषिकेश नाम से जाना जाने लगा.

ऋषिकेश के धार्मिक स्थान

  1. नीलकंठ महादेव मंदिर – यह भगवान् शिव का बहुत ही प्राचीन और प्रसिद्ध मन्दिर है जोकि ऋषिकेश से 32 किमी पर है. यह एक पर्वत के ऊपर स्थित है, जिसकी ऊचाई 1330 मी है. यह मंदिर तीन घाटियों से घिरा हुआ है, मणिकूट, ब्रम्हाकूट और विष्णुकूट. यह धार्मिक स्थान दो सदाबहार नदियों पंकजा और मधुमती के संगम से बना है.
  2. भरत मंदिर – यह मंदिर आदि गुरु शंकराचार्य जी ने लगभग 12वीं शताब्दी में बनवाया था. भरत मंदिर गंगा नदी के तट पर ऋषिकेश के हृदय में स्थित है. इस मंदिर के पवित्र स्थान में भगवान् विष्णु की प्रतिमा है जोकि एक सालिग्राम के ऊपर तराशी गई है. त्रिपाल के अंदर ही प्रतिमा के ऊपर श्री यंत्र आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा लगाया गया है.
  3. त्रयम्बकेश्वर मंदिर – यह प्रसिद्ध मंदिर गंगा नदी की तट पर स्थित है. इसकी 13 मंजिले है और हर मंजिल में बहुत सारे हिन्दू देवी-देवता विराजमान है. यह मंदिर किसी एक देवी या देवता का नही है. इस मंदिर में लक्ष्मण झूला से होते हुए जाया जाता है.
  4. लक्ष्मण मंदिर – यह प्रसिद्ध मंदिर गंगा नदी के तट पर स्थित है. मंदिर में मूर्तिकला और उसकी दीवारों में चित्रकारी की गई है जिसके लिए यह प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि भगवान् श्री राम के भाई,लक्ष्मण ने इस जगह में अध्यात्मक ज्ञानोदय को प्राप्त करने के लिए ध्यान किया था.
  5. कुंजापुरी मंदिर – इस मंदिर का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है. यह पर्वत के 1676 मी ऊचाई पर स्थित है. उत्तराखंड में कुंजापुरी देवी मंदिर 52 शक्तिपीठ में से एक है. कहा जाता है कि जब भगवान् शिव देवी सती का शव ले जा रहे थे, तब देवी सती का धड़ इसी जगह पर गिर गया था. इसलिए इसे शक्तिपीठ कहा जाता है.
  6. रघुनाथ मंदिर – यह ऋषिकेश में धार्मिक उत्सव के लिए बहुत जरुरी स्थान है. यह मंदिर भगवान् श्री राम और उनकी पत्नी देवी सीता को समर्पित है. यह सभी जरुरी धार्मिक जगहों में से एक है.
  7. वीरभद्र मंदिर – यह भगवान् शिव को समर्पित है. यह मंदिर 1300 साल पुराना है. यहाँ वीरभद्र जी ने भगवान शिव की उपस्थिती में आराधना की थी.
  8. वशिष्ठ गुफा – यह बहुत प्राचीन गुफा है जहां ऋषि वशिष्ठ ध्यान किया करते थे. ऋषि वशिष्ठ भगवान ब्रम्हा के मानस पुत्र थे और ये 7 सप्तऋषियों में से एक थे. यह गुफा ऋषिकेश से 25 किमी दूर बद्रीनाथ रोड में स्थित है.
  9. ऋषिकुण्ड – यह रघुनाथ मंदिर के पास स्थित एक तलाब है. कुब्ज संत जी ने इसको स्थापित किया और ईश्वर की आराधना से यमुना के पवित्र जल से इस तलाब को भरा गया.
  10. त्रिवेणी घाट – यह तीन पवित्र नदियों का संगम है गंगा, यमुना और सरस्वती. यहाँ लोग स्नान करने आते है, यह बहुत प्रसिद्ध धार्मिक स्थान है. कहा जाता है कि इस संगम में डुबकी लगाने से आत्मा शुद्ध हो जाती और सारे पाप धुल जाते है. लोग अधिक मात्रा में यहाँ पंहुच कर स्नान करते है और संध्या के समय यहाँ माँ गंगा जी की महा आरती होती है जिसकी लोग पूजा करते है और आनंद उठाते है.
  11. गीता भवन – ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम में गंगा नदी के तट पर एक बहुत बड़ा काम्प्लेक्स है. इस काम्प्लेक्स में बहुत से हॉल और 1000 कमरे है, जिसमें भक्त मुफ्त में बिना किसी परेशानी के आसानी से रह सकते है. यहाँ बहुत से सत्संग और ध्यान के कार्यक्रम होते है जिसमें हर साल बहुत से भक्त सम्मलित होने आते है.