आलमपुर छात्र आत्महत्या मामला: प्रिंसिपल समेत छह आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, गिरफ्तारी के लिए पुलिस की लगातार दबिश

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के आलमपुर स्थित डीएवी स्कूल के कक्षा 11 के छात्र की कथित आत्महत्या मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय, हमीरपुर ने स्कूल के प्रिंसिपल तथा पांच शिक्षकों को बड़ा झटका देते हुए उनकी अग्रिम एवं अंतरिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत के इस फैसले के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है और पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद सभी छह आरोपी अपने-अपने ठिकानों से अनुपस्थित बताए जा रहे हैं। पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं और उनकी तलाश जारी है। जांच एजेंसियां आरोपियों की लोकेशन का पता लगाने के लिए तकनीकी साक्ष्यों का भी सहारा ले रही हैं।

यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब डीएवी स्कूल, आलमपुर के एक छात्र ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी। छात्र के पास से मिले कथित सुसाइड नोट में कुछ शिक्षकों पर मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए गए थे। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया था तथा स्कूल परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। इसके बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने छात्र के कथित सुसाइड नोट, स्कूल के रिकॉर्ड, शिक्षकों से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को अपने कब्जे में लेकर जांच का दायरा बढ़ाया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभिन्न एजेंसियां भी इसकी निगरानी कर रही हैं। वहीं, कांगड़ा जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस से जांच की प्रगति रिपोर्ट तलब की है और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद पुलिस के पास आरोपियों से हिरासत में पूछताछ का रास्ता खुल गया है। यदि आरोपी शीघ्र जांच में शामिल नहीं होते, तो पुलिस उनके विरुद्ध आगे की कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है।

उधर, छात्र के परिजन निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की मांग पर कायम हैं। उनका कहना है कि मामले में सभी तथ्यों को सामने लाया जाए और यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

राज्यभर में चर्चा का विषय बने इस मामले पर अब सबकी निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है तथा किसी भी दोषी को कानून के दायरे से बाहर नहीं रहने दिया जाएगा।