हिमाचल बजट 2026-27 पर सियासी घमासान
शिमला: हिमाचल प्रदेश के बजट 2026-27 को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सरकार के बजट पर तीखा हमला बोलते हुए इसे विकास विरोधी और आर्थिक संकट को बढ़ाने वाला करार दिया है। पार्टी के प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने बजट को “हिमाचल को कर्ज में डुबोने का ब्लूप्रिंट” बताया।
कर्ण नंदा ने कहा कि बजट के आंकड़े ही सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करते हैं। उनके अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में जहां बजट का आकार ₹58,514 करोड़ था, वहीं इस बार इसे घटाकर ₹54,928 करोड़ कर दिया गया है। करीब ₹3,586 करोड़ की कमी को उन्होंने विकास कार्यों के प्रति सरकार की उदासीनता का संकेत बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार स्वयं यह स्वीकार कर चुकी है कि हिमाचल ‘डेब्ट ट्रैप’ की स्थिति में पहुंच चुका है, जहां लिया गया कर्ज ब्याज और किस्तों में ही खर्च हो रहा है। नंदा के अनुसार, यह वित्तीय कुप्रबंधन की स्पष्ट तस्वीर है, जो आने वाले समय में राज्य की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकती है।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि पिछले आठ वर्षों में प्रदेश को जीएसटी के कारण लगभग ₹25,000 करोड़ का नुकसान हुआ है, लेकिन सरकार इसके समाधान के लिए कोई ठोस योजना या वैकल्पिक राजस्व मॉडल पेश नहीं कर पाई है। उन्होंने इसे “बहानों की राजनीति” बताते हुए कहा कि सरकार के पास वित्तीय सुधार का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है।
विकास कार्यों को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा। नंदा ने दावा किया कि प्रदेश में 300 से अधिक परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं, जबकि उनके लिए बजट में मात्र ₹500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने इसे प्रशासनिक कमजोरी और योजनाओं के क्रियान्वयन में विफलता का उदाहरण बताया।
कर्ण नंदा ने केंद्र और अंतरराष्ट्रीय सहायता से जुड़ी योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसएएससीआई जैसी योजनाओं को सरकार “सहायता” के रूप में पेश कर रही है, जबकि वास्तविकता में यह दीर्घकालिक ऋण है, जिसकी अदायगी आने वाली पीढ़ियों को करनी पड़ेगी। उनके अनुसार, इस तरह की नीतियां राज्य को दीर्घकालिक कर्ज के बोझ तले दबा रही हैं।
पर्यावरणीय मुद्दों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश हर वर्ष देश को लगभग ₹90,000 करोड़ की पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करता है, लेकिन राज्य सरकार इस महत्वपूर्ण योगदान के अनुरूप अपने हितों की रक्षा करने में असफल रही है।
अपने बयान के अंत में नंदा ने कहा कि यह बजट विकास की दिशा में ठोस कदम उठाने के बजाय कटौती और कर्ज पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने राज्य को आर्थिक अस्थिरता की ओर धकेल दिया है और जनता आने वाले समय में इसका जवाब देगी।
हिमाचल प्रदेश का बजट सामने आने के बाद इस तरह की तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं यह दर्शाती हैं कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में आर्थिक मुद्दे और अधिक केंद्र में रहने वाले हैं।






