कुल्लू में पेयजल संकट ने लिया स्वास्थ्य आपदा का रूप: दूषित पानी से फैल रहा पीलिया, व्यवस्था पर गंभीर सवाल



कुल्लू जिला मुख्यालय के आखाड़ा बाजार और आसपास के इलाकों में पेयजल आपूर्ति से जुड़ा एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने जनस्वास्थ्य को सीधे खतरे में डाल दिया है। वार्ड नंबर 2, आर्य समाज गली और इनर आखाड़ा बाजार में जल शक्ति विभाग की लापरवाही अब एक संभावित स्वास्थ्य संकट में बदलती नजर आ रही है, जहां दूषित पानी की सप्लाई के चलते दर्जनों लोग पीलिया जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ चुके हैं।

स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि जिन पाइपलाइनों से लोगों के घरों तक पीने का पानी पहुंचना चाहिए, वे कई स्थानों पर गंदी नालियों के बीच से गुजर रही हैं। इन पाइपों में लंबे समय से लीकेज है, जिसके कारण नालियों का दूषित और मटमैला पानी सीधे पेयजल में मिल रहा है। परिणामस्वरूप लोगों के घरों में साफ पानी की जगह गंदगी मिश्रित पानी पहुंच रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है। कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद विभागीय स्तर पर ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि लगभग हर दूसरे घर में कोई न कोई व्यक्ति बीमार पड़ रहा है, जिसमें बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे अधिक असर देखा जा रहा है।

आर्य समाज गली के  निवासियों के अनुसार, केवल उनके क्षेत्र में ही पिछले कुछ दिनों में 8 से 10 लोग पीलिया से प्रभावित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि विभाग को लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। यह लापरवाही केवल प्रशासनिक कमी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों के जीवन से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है।

यह स्थिति कई बड़े सवाल खड़े करती है—क्या आज के दौर में भी लोगों को सुरक्षित पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए इस तरह के खतरे उठाने पड़ेंगे? क्या विभागीय तंत्र केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा, जबकि जमीनी हकीकत लगातार बिगड़ती जा रही है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित पानी के लगातार सेवन से पीलिया, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह स्थिति एक बड़े जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि शहर में जहां-जहां भी पेयजल पाइपलाइनें नालियों के संपर्क में हैं, उनकी तुरंत जांच कर लीकेज को ठीक किया जाए और पाइपलाइन व्यवस्था को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई न जाए।

यह केवल एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है। आज जब देश स्मार्ट सिटी और आधुनिक विकास की बात कर रहा है, तब इस तरह की बुनियादी लापरवाही न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज के लिए भी शर्मनाक स्थिति पैदा करती है।

अब जरूरत है त्वरित, ठोस और जिम्मेदार कार्रवाई की—क्योंकि स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।