ज़िला परिषद सोलन के 17 वार्डों का परिसीमन: प्रारूप अधिसूचना जारी, आपत्तियों के लिए 7 दिन का समय



सोलन जिले की पंचायती राज व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ज़िला परिषद सोलन के निर्वाचन क्षेत्रों (वार्ड संख्या 1 से 17) के परिसीमन की प्रारूप अधिसूचना प्रकाशित कर दी गई है। उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 9 के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह अधिसूचना जारी की है।

इस प्रारूप अधिसूचना के अनुसार सोलन जिले के विभिन्न विकास खण्डों की ग्राम सभाओं को पुनर्गठित करते हुए नए निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण किया गया है। कुनिहार विकास खण्ड के अंतर्गत दाड़ला, धुन्धन और भूमती निर्वाचन क्षेत्रों का गठन किया गया है, जिनमें दर्जनों ग्राम सभाओं को सम्मिलित किया गया है। कण्डाघाट विकास खण्ड में वाकना और दंघील निर्वाचन क्षेत्र बनाए गए हैं, जिनमें सोलन विकास खण्ड की कुछ ग्राम सभाओं को भी शामिल किया गया है।

इसी प्रकार सोलन विकास खण्ड में सलोगड़ा और चेवा निर्वाचन क्षेत्र बनाए गए हैं, जिनमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की ग्राम सभाएं सम्मिलित हैं। धर्मपुर विकास खण्ड के अंतर्गत धर्मपुर और टकसाल निर्वाचन क्षेत्रों का गठन किया गया है। पट्टा विकास खण्ड में दाड़वा और मंधाला निर्वाचन क्षेत्र बनाए गए हैं, जिनमें नालागढ़ और धर्मपुर विकास खण्ड की कुछ ग्राम सभाओं को भी जोड़ा गया है।

नालागढ़ विकास खण्ड में खेड़ा, रडियाली, दभोटा, बारियां, नन्ड और बगलैहड़ निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया गया है, जिनमें सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों की ग्राम सभाओं को नए सिरे से संगठित किया गया है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ज़िला परिषद सोलन के सभी 17 वार्डों के परिसीमन की यह प्रारूप प्रस्तावना सार्वजनिक अवलोकन के लिए उपायुक्त कार्यालय, ज़िला परिषद कार्यालय, पंचायत समितियों के कार्यालयों तथा सभी ग्राम पंचायत कार्यालयों में उपलब्ध रहेगी, ताकि आम नागरिक और जनप्रतिनिधि इसे देख सकें।

उपायुक्त मनमोहन शर्मा ने बताया कि यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था इस परिसीमन प्रारूप को लेकर आपत्ति या आक्षेप दर्ज करवाना चाहती है, तो वह ठोस और पुष्ट आधार के साथ सात दिनों के भीतर उपायुक्त कार्यालय में अपनी आपत्ति प्रस्तुत कर सकती है। निर्धारित अवधि के बाद प्राप्त होने वाली किसी भी आपत्ति या सुझाव पर विचार नहीं किया जाएगा।

यह परिसीमन प्रक्रिया आगामी पंचायती राज चुनावों को अधिक संतुलित, प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रशासनिक रूप से व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे ग्रामीण लोकतंत्र की संरचना को और मजबूत आधार मिल सकेगा।