हिमाचल प्रदेश में दिव्यांगजनों से जुड़े मुद्दों को लेकर सामाजिक न्याय की दिशा में एक अहम पहल करते हुए अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग द्वारा आज एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विशेष रूप से नेत्रहीन संघ द्वारा उठाई गई मांगों और दिव्यांगजनों की लंबित समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान विभाग के निदेशक सुमित खिमटा ने बताया कि अभी तक केवल पशुपालन तथा मुद्रण एवं स्टेशनरी विभागों ने ही दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित बैकलॉग पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किए हैं। उन्होंने अन्य सभी विभागों से अपील की कि वे दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित रिक्त पदों को शीघ्र भरने की प्रक्रिया शुरू करें, ताकि लंबे समय से लंबित नियुक्तियों को पूरा किया जा सके।
शिक्षा विभाग की प्रगति की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित जेबीटी पदों के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए हैं। कुल 119 जेबीटी पदों को भरा गया है, जिनमें दृष्टिबाधित, अस्थिबाधित, श्रवण बाधित, बहु-दिव्यांग और बौद्धिक दिव्यांग श्रेणियों के अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई है। यह कदम प्रदेश में समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 94 टीजीटी पदों के लिए भी विज्ञापन जारी किया गया है, जिनमें बड़ी संख्या में पद विभिन्न दिव्यांग श्रेणियों के लिए आरक्षित हैं। इससे प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में दिव्यांगजनों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
बैठक में एचआरटीसी बसों में निःशुल्क यात्रा के लिए अनिवार्य किए गए हिम बस कार्ड का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। सुमित खिमटा ने बताया कि दिव्यांगजनों को यह कार्ड बनवाने में सुविधा देने के लिए विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, नेत्रहीन संघ ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए मांग की कि दिव्यांगजनों को हिम बस कार्ड से छूट दी जाए और बिना कार्ड के भी निःशुल्क यात्रा की सुविधा दी जाए। इस विषय को लेकर मामला उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है।
बैठक में दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अंतर्गत दी जाने वाली दिव्यांग राहत भत्ता राशि बढ़ाने, दिव्यांगजनों के लिए स्वतंत्र राज्य आयुक्त की नियुक्ति, सहारा पेंशन योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने, बिना शर्त दृष्टिबाधित व्यक्तियों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने तथा दिव्यांग कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
नेत्रहीन संघ की ओर से यह भी बताया गया कि सहारा पेंशन योजना के लाभार्थियों को पिछले छह महीनों से पेंशन नहीं मिली है। इस मामले को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के समक्ष उठाने का निर्णय लिया गया।
नेत्रहीन संघ के अध्यक्ष शोभू राम ने बैठक आयोजित करने और दिव्यांगजनों के लिए पद भरने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि बैकलॉग पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि योग्य दिव्यांग अभ्यर्थियों को शीघ्र रोजगार मिल सके।
बैठक में मुद्रण एवं स्टेशनरी नियंत्रक प्रभा राजीव सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, नेत्रहीन संघ और अन्य दिव्यांग संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।





