
शिमला में रजनी पाटिल, राकेश सिंघा और संजय चौहान की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस; मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल
शिमला। कथित वोट चोरी और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPIM ने साझा मोर्चा बनाया है। शनिवार को शिमला स्थित राजीव भवन में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल के साथ CPIM के वरिष्ठ नेता राकेश सिंघा और संजय चौहान भी मौजूद रहे। नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। हालांकि, ये आरोप विपक्षी दलों के दावे हैं; प्रेस कॉन्फ्रेंस में इनके समर्थन में प्रस्तुत सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती।
1 नवंबर को दिल्ली में INDIA ब्लॉक की रैली
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस और CPIM के लगभग 10,000 से 15,000 कार्यकर्ता 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित INDIA ब्लॉक की रैली में शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस ने इस रैली में देशभर से लगभग 10 लाख लोगों के जुटने का लक्ष्य बताया है। इसका प्रमुख मुद्दा कथित वोट चोरी और SIR प्रक्रिया के विरोध को बनाया गया है।
रजनी पाटिल ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
रजनी पाटिल ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने विपक्षी दलों की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि मतदान के अधिकार और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। कांग्रेस ने हिमाचल में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को आगे बढ़ाने और जिलों में जनसंपर्क गतिविधियां तेज करने की बात भी कही है।
CPIM ने भी विपक्षी एकता की वकालत की
CPIM नेता राकेश सिंघा ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं तथा सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को इस मुद्दे पर मिलकर आवाज उठानी चाहिए। संजय चौहान भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर पहले सवाल उठा चुके हैं। दोनों नेताओं ने कथित वोट चोरी के विरोध को व्यापक लोकतांत्रिक मुद्दा बताया।
राजनीतिक एकजुटता, लेकिन चुनावी गठबंधन पर स्थिति स्पष्ट नहीं
कांग्रेस और CPIM का एक मंच पर आना हिमाचल की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, लेकिन फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में इसे आगामी चुनावों के लिए औपचारिक गठबंधन घोषित नहीं किया गया है। मौजूदा साझा पहल कथित वोट चोरी, मतदाता अधिकारों और SIR के विरोध पर केंद्रित है। ऐसे में 1 नवंबर की रैली यह संकेत दे सकती है कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर अपना आंदोलन किस स्तर तक ले जाना चाहते हैं, जबकि दोनों दलों के बीच भविष्य के चुनावी तालमेल को लेकर अभी कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है।





