
मॉल रोड और आसपास के खानपान प्रतिष्ठानों में स्वच्छता को लेकर उठे सवाल, खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और नियमों के पालन पर जोर
शिमला। पर्यटन नगरी शिमला में खानपान प्रतिष्ठानों की स्वच्छता और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। मॉल रोड और शहर के प्रमुख बाजारों में पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों की आवाजाही को देखते हुए ढाबों, मिठाई की दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई बनाए रखना अहम है। खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले कारोबारियों को विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। गंभीर या लगातार उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार लाइसेंस निलंबित करने अथवा रद्द करने की कार्रवाई भी संभव है।
हाल में सामने आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिमला में खाद्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग और नगर निगम की टीमों ने खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। 17 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में मिडिल बाजार की कुछ मिठाई की दुकानों में गंदगी, कॉकरोच और खुले में रखे खाद्य पदार्थ मिलने का उल्लेख किया गया था। टीम ने कुछ मिठाइयों को मौके पर नष्ट करवाया और संबंधित दुकानदारों को नोटिस जारी कर कमियां दूर करने के निर्देश दिए। वहीं, 27 अक्टूबर को ढाबों और मिठाई की दुकानों में निरीक्षण अभियान की खबर भी सामने आई। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्पष्ट नहीं होता कि मॉल रोड के सभी ढाबों में गंदगी पाई गई है या किसी विशेष ढाबे का लाइसेंस रद्द करने का अंतिम आदेश जारी हो चुका है।
खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत किसी भी खाद्य कारोबार में साफ-सुथरा परिसर, सुरक्षित पेयजल, खाद्य सामग्री का उचित भंडारण और भोजन तैयार करने की स्वच्छ व्यवस्था जरूरी है। कच्चे और तैयार खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तरीके से रखना, भोजन को धूल और कीड़े-मकोड़ों से बचाना तथा रसोई और बर्तनों की नियमित सफाई भी आवश्यक है। इन मानकों का पालन नहीं होने पर खाद्य पदार्थ दूषित हो सकते हैं और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
निरीक्षण के दौरान केवल दुकान के सामने की सफाई ही नहीं, बल्कि रसोई, खाद्य सामग्री रखने की जगह, इस्तेमाल किए जा रहे पानी और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया की जांच भी महत्वपूर्ण है। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित प्रतिष्ठान को नोटिस दिया जा सकता है, सुधार के निर्देश जारी किए जा सकते हैं और मामले की गंभीरता के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होती है।
शिमला जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल में खाद्य सुरक्षा का सवाल विशेष महत्व रखता है। मॉल रोड पर रोजाना बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग भोजन तथा अन्य खाद्य सामग्री खरीदते हैं। ऐसे में किसी भी प्रतिष्ठान की लापरवाही न केवल ग्राहकों की सेहत को प्रभावित कर सकती है, बल्कि शहर की पर्यटन छवि पर भी असर डाल सकती है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी पहले नगर निगम को पर्यटकों की सुविधा, शहर की स्वच्छता, कचरे के सुरक्षित निपटान और खाद्य सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दे चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण के साथ कारोबारियों को नियमों के प्रति जागरूक करना और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई करना जरूरी है। वहीं, ग्राहकों को भी भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए। यदि किसी दुकान या ढाबे में खुले में रखा भोजन, गंदे बर्तन या अस्वच्छ परिस्थितियां दिखाई दें, तो संबंधित विभाग को इसकी सूचना दी जा सकती है।
खाद्य कारोबारियों के लिए संदेश साफ है—साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा महज औपचारिकताएं नहीं, बल्कि ग्राहकों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी हैं। नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई हो सकती है, जबकि नियमित निरीक्षण और जवाबदेही से ही शिमला में सुरक्षित खानपान व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है।





