सरकार ने शुरू की जांच, चामियाणा अस्पताल की घटना से हिला शिमला: स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल



हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिमला के चामियाणा क्षेत्र स्थित अस्पताल में सामने आई भयावह घटना का तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है और पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल के आदेश दे दिए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिम्मेदार अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की गई है और लापरवाही के लिए जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

इसके बाद सामने आई तस्वीरें और घटनाक्रम ने न केवल शिमला, बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।

मंगलवार की सुबह Chamiyana क्षेत्र उस समय स्तब्ध रह गया, जब Atal Institute of Medical Super Speciality परिसर में एक आवारा कुत्ते को इंसान का कटा हुआ पैर मुंह में दबाए घूमते हुए देखा गया। यह दृश्य किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं था। देखते ही देखते अस्पताल परिसर और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोगों में भय व आक्रोश फैल गया।

कैसे हुई इतनी बड़ी चूक

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अस्पताल में एक मरीज का ऑपरेशन किया गया था, जिसमें दुर्घटना के कारण खराब हो चुके पैर को काटकर अलग किया गया था। चिकित्सा नियमों के तहत ऐसे जैव-चिकित्सीय अवशेषों (बायो-मेडिकल वेस्ट) का निस्तारण बेहद सुरक्षित और नियंत्रित प्रक्रिया के तहत किया जाना अनिवार्य होता है।

लेकिन शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस कक्ष में ऐसे अंगों को नष्ट करने के लिए अस्थायी रूप से रखा जाता है, वहां का दरवाजा ठीक से बंद नहीं था। इसी गंभीर लापरवाही का फायदा उठाकर एक आवारा कुत्ता अंदर घुसा और कटे हुए अंग को बाहर ले आया। यह सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता पर सीधा सवाल है।

सरकार और प्रशासन का एक्शन

घटना के सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। सरकार के निर्देश पर:

* मामले की आधिकारिक जांच शुरू कर दी गई है
* संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी गई है
* सफाई व्यवस्था से जुड़े सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है
* यह पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी कौन था और दरवाजा खुला कैसे छोड़ा गया

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह जांच केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया प्रणाली (system failure) के स्तर पर जांची जाएगी।

जनता में आक्रोश और चिंता

इस घटना ने आम लोगों, मरीजों और उनके परिजनों के मन में गहरी चिंता पैदा कर दी है। लोगों का सवाल है कि जिस संस्थान पर जीवन बचाने की जिम्मेदारी है, वहां **मानवीय गरिमा, स्वच्छता और सुरक्षा** की इतनी गंभीर अनदेखी कैसे हो सकती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता और निगरानी प्रणाली की विफलता का प्रतीक है। अस्पताल जैसे स्थानों में अगर बायो-मेडिकल वेस्ट की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं हो पा रही, तो आम मरीज की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?

सिस्टम के लिए चेतावनी

यह घटना केवल एक अस्पताल की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चेतावनी है। यह मामला दिखाता है कि:

* निगरानी तंत्र कमजोर है
* जिम्मेदारी तय करने की प्रणाली स्पष्ट नहीं है
* मानवीय गरिमा और स्वास्थ्य सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा

सरकार द्वारा शुरू की गई जांच अब सिर्फ दोषी खोजने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी और सख्त प्रणालीगत सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

चामियाणा अस्पताल की यह घटना हिमाचल प्रदेश के लिए एक चेतावनी बनकर सामने आई है —
कि स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ इमारतों और मशीनों से नहीं चलती,
वह जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों से चलती है।