सिरमौर के शिलाई में 300 से अधिक पेड़ों का अवैध कटान, सरकार दोषियों को बचाने में लगी : डॉ. राजीव बिंदल


हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र में सैकड़ों चीड़ के पेड़ों के कथित अवैध कटान का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Rajeev Bindal ने इस घटना को गंभीर पर्यावरणीय अपराध बताते हुए राज्य सरकार पर दोषियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दिन-दहाड़े बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होना और उसके बावजूद प्रशासन का लंबे समय तक निष्क्रिय रहना कई सवाल खड़े करता है।

डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि शिलाई क्षेत्र में आरा मशीन लगाकर चीड़ के पेड़ों की कटाई की गई और इसकी तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बावजूद संबंधित विभागों ने तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि अगले ही दिन कुछ लोगों ने स्वयं सोशल मीडिया पर सामने आकर पेड़ काटने की बात स्वीकार की और यह दावा भी किया कि उन्हें 25 पेड़ों की कटाई की अनुमति मिली हुई है, जबकि बाकी अनुमति प्रक्रिया में है।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस मुद्दे को उठाते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार दिन-दहाड़े इतने बड़े स्तर पर पेड़ों का अवैध कटान बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं हो सकता। इसके बाद देर रात 6 तारीख को मामला दर्ज किया गया, जिसमें लगभग 307 पेड़ों के कटान की बात सामने आई। हालांकि, प्रशासन ने यह भी कहा कि अंधेरा होने के कारण उस समय पूरी गणना नहीं हो पाई। डॉ. बिंदल ने सवाल उठाया कि कई दिन बीत जाने के बाद भी पेड़ों की संख्या की पुष्टि उसी आंकड़े पर क्यों अटकी हुई है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार के एक मंत्री ने इस पूरे मामले को भाजपा से जोड़ने का प्रयास किया, जबकि वास्तविकता यह है कि जिन लोगों ने खुले तौर पर पेड़ों की कटाई स्वीकार की है, उनके खिलाफ अब तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई। डॉ. बिंदल ने कहा कि यदि भाजपा से जुड़े किसी व्यक्ति की इसमें संलिप्तता है तो सरकार तुरंत उसे गिरफ्तार करे और कानून के अनुसार कार्रवाई करे।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि जिन 25 पेड़ों की अनुमति का दावा किया जा रहा है, वह अनुमति भी 25 फरवरी को समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पेड़ों का कटान किया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आम लोगों को दो या तीन पेड़ों की अनुमति लेने में महीनों लग जाते हैं, ऐसे में 25 पेड़ों की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई और क्या इसमें संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं होनी चाहिए।

डॉ. बिंदल ने कहा कि जिस स्थान पर यह कथित अवैध कटान हुआ है, वह प्रशासनिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। यह स्थान एसडीएम कार्यालय, पुलिस थाना और वन विभाग के रेंज कार्यालय से महज करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं होना या समय पर कार्रवाई न करना बेहद गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब भाजपा और नेता प्रतिपक्ष Jai Ram Thakur ने इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया, तभी आनन-फानन में दो छोटे कर्मचारियों को निलंबित कर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिन अधिकारियों ने अनुमति दी और जिन्होंने समय रहते कार्रवाई नहीं की, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

डॉ. बिंदल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करती तो भारतीय जनता पार्टी प्रदेशभर में इस मुद्दे को लेकर आंदोलन शुरू करेगी। उनका कहना है कि प्रदेश में जिस तरह वन माफिया सक्रिय हो रहा है, उससे यह संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं उन्हें सत्ता का संरक्षण मिल रहा है।

उन्होंने राज्य की Sukhvinder Singh Sukhu सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार लगातार केंद्र के खिलाफ आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व कांग्रेस सरकार के दस वर्षों के दौरान हिमाचल प्रदेश को लगभग 18,000 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान मिला था, जबकि Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने राज्य को लगभग 89,000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की है।

डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि केंद्र से मिलने वाले धन का सही उपयोग नहीं हो रहा और सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सेवानिवृत्त कर्मचारी और अधिकारी अपने बकाया भुगतान के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, जो सरकार की नीतियों और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि सिरमौर जिले के साथ भी राज्य सरकार का रवैया उपेक्षापूर्ण रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दोहराया कि पार्टी सिरमौर सहित पूरे प्रदेश के हितों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाती रहेगी और यदि समय रहते निष्पक्ष जांच व सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा जनता के साथ सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी।