चंडीगढ़: हरियाणा में स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सरकारी विद्यालयों को आधुनिक शिक्षण केंद्रों में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल को गति दी है। प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) योजना के अंतर्गत प्रदेश के चयनित विद्यालयों को अगले दो वर्षों तक बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रति विद्यालय लगभग दो करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह राशि केंद्र सरकार की ओर से प्रदान की जा रही है और इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों को आधुनिक, तकनीक-सक्षम तथा छात्र-केंद्रित शिक्षण संस्थानों में परिवर्तित करना है।
प्रदेश के मुख्य सचिव Anurag Rastogi ने चंडीगढ़ में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान योजना की प्रगति का विस्तृत आकलन करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीएम श्री स्कूलों की बुनियादी और शैक्षणिक आवश्यकताओं का व्यवस्थित आकलन किया जाए। इसके लिए जिला स्तर पर उपायुक्तों और अतिरिक्त उपायुक्तों की अध्यक्षता में समितियों के गठन का निर्देश दिया गया है। इन समितियों का कार्य अपने-अपने जिलों में स्थित पीएम श्री विद्यालयों का निरीक्षण करना, वहां की आधारभूत सुविधाओं और शैक्षणिक आवश्यकताओं का मूल्यांकन करना तथा प्राथमिकता वाले विकास कार्यों की पहचान करना होगा, ताकि उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि इन विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने के निर्देश भी दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों में तैनात हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) अधिकारियों को भी इस पहल से जोड़ा जाएगा। प्रत्येक अधिकारी को कम से कम एक पीएम श्री विद्यालय को गोद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि वे स्कूलों के विकास कार्यों की निगरानी और मार्गदर्शन में सक्रिय भूमिका निभा सकें। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करना और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देना है।
राज्य सरकार का मानना है कि पीएम श्री पहल के माध्यम से सरकारी स्कूलों को आदर्श संस्थानों के रूप में विकसित किया जा सकता है। यह योजना केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा के समग्र स्वरूप में बदलाव लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। योजना के तहत स्कूलों में स्मार्ट कक्षाओं, डिजिटल शिक्षण उपकरणों, आधुनिक प्रयोगशालाओं और अनुभव आधारित शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को पारंपरिक रटने वाली शिक्षा के बजाय जिज्ञासा आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा प्रदान की जा सके।
समीक्षा बैठक के दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सम्मान की व्यवस्था की जाएगी। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के तीन सर्वश्रेष्ठ पीएम श्री विद्यालयों और तीन मॉडल संस्कृति स्कूलों को सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान शैक्षणिक उपलब्धियों, अवसंरचना विकास और नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों के आधार पर प्रदान किया जाएगा। इसके लिए जिला और मंडल स्तर पर चयन समितियों का गठन किया जाएगा, जो विभिन्न मानकों के आधार पर विद्यालयों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करेंगी।
हरियाणा में इस योजना के अंतर्गत अब तक कुल 250 विद्यालयों का चयन किया जा चुका है। योजना के विभिन्न चरणों में इन स्कूलों को शामिल किया गया है, जिनमें पहले चरण में 124 विद्यालय, दूसरे चरण में 111 विद्यालय, तीसरे चरण में 6 और पांचवें चरण में 9 विद्यालय शामिल हैं। इस चयन प्रक्रिया का उद्देश्य राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को संतुलित रूप से योजना के लाभ से जोड़ना है।
प्रदेश के 143 विकास खंडों में से 137 खंडों को इस योजना के तहत कवर किया जा चुका है। इनमें से 113 विकास खंडों में दो-दो पीएम श्री विद्यालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें एक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और एक प्राथमिक या माध्यमिक स्तर का विद्यालय शामिल है। शेष 24 विकास खंडों में एक-एक पीएम श्री विद्यालय स्थापित किया गया है, जिससे राज्य के अधिकांश क्षेत्रों को योजना के दायरे में लाया जा सका है।
वित्तीय दृष्टि से भी यह योजना महत्वपूर्ण है। वर्ष 2025-26 के लिए इस कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 191.69 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इनमें से लगभग 95.87 करोड़ रुपये की स्वीकृति पहले ही प्राप्त हो चुकी है, जबकि अब तक करीब 29.78 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि आगामी महीनों में विभिन्न विकास कार्यों की गति बढ़ने के साथ खर्च की प्रक्रिया भी तेज होगी।
पीएम श्री विद्यालयों को पर्यावरण अनुकूल “ग्रीन स्कूल” के रूप में विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत सौर ऊर्जा संयंत्र, एलईडी आधारित ऊर्जा बचत प्रणाली, वर्षा जल संचयन व्यवस्था, पोषण वाटिकाएं, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली और प्लास्टिक मुक्त परिसर जैसी सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और टिकाऊ विकास के सिद्धांतों को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाना है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो हरियाणा के सरकारी स्कूलों की छवि में व्यापक सुधार हो सकता है। आधुनिक सुविधाओं, डिजिटल शिक्षा और बेहतर प्रशासनिक निगरानी के साथ यह पहल न केवल राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगी बल्कि उत्तर भारत के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल के रूप में उभर सकती है।
कुल मिलाकर पीएम श्री योजना हरियाणा में सरकारी स्कूलों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक व्यापक प्रयास के रूप में सामने आ रही है। आने वाले वर्षों में इसके परिणाम राज्य की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने और विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।





