हिमाचल के 500 करोड़ के क्रिप्टो घोटाले में ईडी का बड़ा शिकंजा, सुभाष शर्मा का करीबी अतुल सूद गिरफ्तार; 72 लाख रुपये नकद जब्त

शिमला। हिमाचल प्रदेश और पंजाब के हजारों निवेशकों को क्रिप्टोकरेंसी में असाधारण मुनाफे का भरोसा देकर कथित तौर पर ठगने वाले कोरवियो कॉइन (KRO) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच तेज कर दी है। एजेंसी ने चंडीगढ़, मोहाली और जीरकपुर में सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाकर 72 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। इस कार्रवाई में कथित घोटाले के मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा के करीबी सहयोगी अतुल सूद को गिरफ्तार किया गया है। शिमला की विशेष पीएमएलए अदालत ने उसे 5 नवंबर, 2026 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है। ईडी की इस कार्रवाई को करोड़ों रुपये के कथित निवेश घोटाले के वित्तीय नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका का पता लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ईडी के शिमला सब-जोनल कार्यालय ने 28 अक्टूबर को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17(1) के तहत यह तलाशी अभियान चलाया। जांच एजेंसी के अनुसार, छापेमारी के दौरान नकदी के अलावा संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज, बैंक खातों के रिकॉर्ड और कई डिजिटल उपकरण भी कब्जे में लिए गए हैं। इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के जरिए निवेशकों से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल, संपत्तियों की खरीद और कथित वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

ईडी की जांच में अतुल सूद की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। एजेंसी के मुताबिक, वह सुभाष शर्मा का करीबी सहयोगी था और उससे मिलने दुबई भी गया था। आरोप है कि सूद ने वहां सुभाष शर्मा के लिए सम्मेलन और अन्य कार्यक्रम आयोजित करवाने में भूमिका निभाई। जांच एजेंसी का दावा है कि धोखाधड़ी से संबंधित एफआईआर दर्ज होने के बाद भी यह गतिविधियां जारी रहीं। अब ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि इन आयोजनों के माध्यम से निवेशकों को आकर्षित करने, नेटवर्क को सक्रिय रखने और कथित तौर पर जुटाई गई रकम के प्रबंधन में किन लोगों की क्या भूमिका थी।

इस पूरे मामले की जांच हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस की ओर से सुभाष शर्मा तथा उसके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। ईडी के अनुसार, आरोपियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कोरवियो कॉइन के नाम पर मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) आधारित निवेश योजना चलाई। लोगों को इसमें पैसा लगाने के लिए असाधारण और निश्चित मुनाफे का भरोसा दिया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह व्यवस्था वास्तविक निवेश से कमाई करने के बजाय पोंजी मॉडल पर आधारित थी, जिसमें नए निवेशकों से प्राप्त रकम का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए किया जाता था।

ईडी को मिले डिजिटल रिकॉर्ड के विश्लेषण में इस कथित नेटवर्क का व्यापक आकार सामने आया है। एजेंसी के अनुसार, 2.48 लाख से अधिक यूजर इस योजना से प्रभावित हुए और इससे जुड़े लेनदेन का कुल मूल्य 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा। निवेशकों को हुए नुकसान का अनुमान करीब 500 करोड़ रुपये लगाया गया है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 219 मिलियन डॉलर का आंकड़ा कथित लेनदेन का है, जबकि 500 करोड़ रुपये निवेशकों के अनुमानित नुकसान से संबंधित है। दोनों आंकड़े एक-दूसरे के समान नहीं हैं। ईडी की शुरुआती कार्रवाई और पुराने आधिकारिक विवरणों में इस कथित घोटाले का कुल आकार लगभग 2,300 करोड़ रुपये से अधिक भी बताया गया है। इसलिए कुल लेनदेन, कथित घोटाले के आकार और वास्तविक निवेशक नुकसान को अलग-अलग समझना आवश्यक है।

जांच में निवेशकों से रकम जुटाने और उसे आगे पहुंचाने के तरीके को लेकर भी अहम खुलासे हुए हैं। ईडी के अनुसार, नए निवेशकों से अधिकांश धनराशि नकद में एकत्र की जाती थी। अलग-अलग टीमों और उनके प्रमुखों के माध्यम से यह रकम आगे भेजी जाती थी और कथित तौर पर अंत में सुभाष शर्मा तथा उसके सहयोगियों तक पहुंचती थी। जांच में विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा के नाम भी सामने आए हैं। एजेंसी यह भी जांच रही है कि नकदी के अलावा कितनी रकम बैंक खातों, कथित फर्जी कंपनियों और बिचौलियों के माध्यम से स्थानांतरित की गई तथा उसे किन संपत्तियों और अन्य निवेशों में लगाया गया।

ईडी इस मामले में इससे पहले 13 दिसंबर, 2025 और 15 जून, 2026 को भी तलाशी अभियान चला चुकी है। उन कार्रवाइयों के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और लगभग 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की चल संपत्तियों को जब्त किए जाने की जानकारी दी गई थी। एजेंसी ने सुभाष शर्मा के सहयोगियों हेमराज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा, मिलन गर्ग और मासूम जुनेजा को भी गिरफ्तार किया था। अब अतुल सूद की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और विस्तृत होने की संभावना है।

इस कथित घोटाले ने हिमाचल प्रदेश और पंजाब में निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। ऊंचे और सुनिश्चित रिटर्न के लालच में लोगों ने अपनी बचत इस योजना में लगाई थी। क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन निवेश के नाम पर चलाए गए ऐसे नेटवर्क ने आम निवेशकों के सामने वित्तीय जोखिम और साइबर माध्यमों से होने वाली धोखाधड़ी की गंभीर चुनौती खड़ी की है। अब जांच का प्रमुख केंद्र यह पता लगाना है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम कहां गई, किन लोगों ने इस नेटवर्क को संचालित करने में मदद की और कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कानून के तहत जब्त करने की कितनी गुंजाइश है।

ईडी की जांच अभी जारी है। एजेंसी की ओर से लगाए गए आरोपों और गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल उन हजारों निवेशकों की रकम की वसूली और उन्हें न्याय दिलाने का है, जिन्होंने बेहतर भविष्य और आर्थिक लाभ की उम्मीद में अपनी पूंजी इस कथित योजना में लगाई थी।