हिमाचल प्रदेश में नेशनल हाईवे परियोजनाओं से जुड़े कामों में कथित भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर से राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांगड़ा जिले के नूरपुर क्षेत्र में एक पेट्रोल पंप संचालक से एनओसी दिलाने के नाम पर बड़ी रिश्वत मांगने के आरोप में केंद्रीय जांच एजेंसी ने कार्रवाई शुरू की है। इस मामले में Central Bureau of Investigation ने National Highways Authority of India के एक प्रोजेक्ट डायरेक्टर और चंडीगढ़ की एक महिला आर्किटेक्ट के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

शिकायत के अनुसार नूरपुर क्षेत्र के पेट्रोल पंप संचालक ईशान धींगरा को अपने पंप को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने के लिए एनओसी की आवश्यकता थी। आरोप है कि निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारी ने यह संकेत दिया कि बिना बड़ी रकम दिए यह अनुमति मिलना संभव नहीं होगा। इतना ही नहीं, पैसे न देने की स्थिति में हाईवे से जुड़ी अनुमति को रद्द करने की चेतावनी भी दी गई।
शिकायत में यह भी बताया गया कि अधिकारी के कहने पर पीड़ित को चंडीगढ़ की एक महिला आर्किटेक्ट से संपर्क करने को कहा गया। बाद में पालमपुर कार्यालय में हुई मुलाकात के दौरान महिला आर्किटेक्ट ने स्पष्ट किया कि एनओसी के लिए दस लाख रुपये देने होंगे और यह राशि अधिकारी की जानकारी में तय की गई है। बातचीत के दौरान यह भी तय हुआ कि पूरी राशि एक बार में देने के बजाय किस्तों में दी जाएगी और पहली किस्त पांच लाख रुपये रखी गई।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब आरोप है कि पेट्रोल पंप मालिक पर दबाव बनाने के लिए पंप के ठीक सामने लगभग अट्ठाईस मीटर तक जमीन की खुदाई करवा दी गई। इससे पेट्रोल पंप तक वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई और ईंधन आपूर्ति में भी बाधा उत्पन्न होने लगी। इस स्थिति से परेशान होकर पंप संचालक ने अंततः सीबीआई से संपर्क किया और पूरे घटनाक्रम की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद जांच एजेंसी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है और अब इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर से उत्तर भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के संचालन को लेकर उठते रहे सवालों को चर्चा में ला दिया है। कई व्यापारिक संगठनों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि हाईवे परियोजनाओं से जुड़े कई मामलों में एनओसी, कनेक्टिविटी और निर्माण संबंधी अनुमतियों के लिए अनौपचारिक दबाव और कथित लेनदेन की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। हालांकि अधिकांश मामलों में लोग औपचारिक शिकायत करने से बचते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के मामलों की निष्पक्ष जांच व्यापक स्तर पर की जाए तो कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं जो विभागीय तंत्र के भीतर मौजूद कमजोरियों को उजागर कर सकते हैं। कई बार यह आरोप भी लगाए जाते रहे हैं कि परियोजनाओं से जुड़े कुछ अधिकारी लंबे समय से पदों पर रहते हुए भारी संपत्ति अर्जित कर लेते हैं, जिसकी पारदर्शी जांच की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का दायित्व देश में सड़क अवसंरचना को मजबूत करने का है और इस दिशा में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसकी अगुवाई केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मंत्रालय द्वारा पारदर्शिता और जवाबदेही को और सख्ती से लागू किया जाए तो इस तरह के मामलों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश में सामने आए इस ताजा मामले ने यह संकेत दिया है कि यदि परियोजनाओं से जुड़े प्रशासनिक ढांचे में समय-समय पर कठोर निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित न की जाए तो विकास परियोजनाओं के साथ-साथ आम लोगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
अब सभी की निगाहें सीबीआई की जांच पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इस मामले के सामने आने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि जांच के जरिए न केवल इस प्रकरण की सच्चाई सामने आएगी बल्कि यदि इसमें किसी व्यापक नेटवर्क की भूमिका है तो उसका भी खुलासा हो सकता है।





