डॉ. हरमिंदर सिंह बवेजा ने संभाला नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार, नवाचार और किसानोन्मुखी विकास पर रहेगा विशेष जोर

हिमाचल प्रदेश के शैक्षणिक और बागवानी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में प्रख्यात फ्लोरीकल्चर वैज्ञानिक डॉ. हरमिंदर सिंह बवेजा ने शनिवार को डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार औपचारिक रूप से संभाल लिया। उनके कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही विश्वविद्यालय में शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान नवाचार और किसान-केंद्रित विस्तार गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

करीब साढ़े तीन दशकों से अधिक के व्यापक अनुभव के साथ डॉ. बवेजा शिक्षा, अनुसंधान, प्रशासन और प्रसार कार्यों में एक स्थापित नाम रहे हैं। उन्होंने न केवल अकादमिक क्षेत्र में बल्कि नीतिगत और प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इससे पहले वे हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध निदेशक, हिमाचल प्रदेश के बागवानी निदेशक और उत्तराखंड के बागवानी निदेशक जैसे अहम पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इन भूमिकाओं में उनके अनुभव ने उन्हें कृषि एवं बागवानी क्षेत्र की जमीनी चुनौतियों और संभावनाओं को गहराई से समझने का अवसर दिया।

विश्वविद्यालय के साथ उनका जुड़ाव भी पुराना रहा है, जहां वे फ्लोरीकल्चर विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके हैं। एक शिक्षाविद् के रूप में उन्होंने अनेक स्नातकोत्तर और पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है, जिससे अकादमिक जगत में उनकी मजबूत पकड़ और मार्गदर्शक भूमिका स्पष्ट होती है। उनके द्वारा प्रकाशित शोध पत्रों और पुस्तकों ने न केवल विषय की समझ को समृद्ध किया है, बल्कि पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण और कौशल विकास पहलों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

डॉ. बवेजा का अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने FAO के सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और यूरोप तथा संयुक्त अरब अमीरात में अध्ययन दौरों के माध्यम से वैश्विक कृषि प्रणालियों का अध्ययन किया। यह अनुभव उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाता है, जिसका लाभ विश्वविद्यालय की नीतियों और कार्यक्रमों में दिखाई देने की संभावना है।

प्रशासनिक स्तर पर भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उनके नेतृत्व में कृषि विपणन अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए विश्व बैंक समर्थित परियोजनाओं के तहत लगभग 150 करोड़ रुपये की राशि जुटाई गई। वहीं, उत्तराखंड में उन्होंने 8500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन में भूमिका निभाई। यह अनुभव उन्हें बड़े स्तर पर संसाधन प्रबंधन और परियोजना संचालन में सक्षम बनाता है।

उनकी उपलब्धियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। ई-नाम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उन्हें वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि एशिया पैसिफिक एक्सीलैंस अवार्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से भी उन्हें नवाजा गया है। ये सम्मान उनके कार्यों की गुणवत्ता और प्रभाव को दर्शाते हैं।

अपने नए दायित्व के संदर्भ में डॉ. बवेजा का दृष्टिकोण स्पष्ट और दूरदर्शी माना जा रहा है। वे विश्वविद्यालय को एक ऐसे संस्थान के रूप में विकसित करना चाहते हैं जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो, जहां नवाचार आधारित शोध को बढ़ावा मिले और जो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने। इसके साथ ही उद्योगों के साथ मजबूत साझेदारी और किसानों के लिए उपयोगी विस्तार कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि विश्वविद्यालय की उपलब्धियां सीधे जमीनी स्तर तक पहुंच सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय आने वाले समय में न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता का केंद्र बनेगा, बल्कि हिमाचल प्रदेश की बागवानी अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने में भी अहम भूमिका निभाएगा।