एसआईआर के खिलाफ दिल्ली में सुक्खू की अगुवाई में हिमाचल कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, INDIA गठबंधन के साथ सुप्रीम कोर्ट मार्च में हुए शामिल

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने उठाए मतदाता सूची की पारदर्शिता के सवाल; मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का दबाव तेज**

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर सोमवार को दिल्ली में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने अपना विरोध तेज किया। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने INDIA गठबंधन के प्रस्तावित सुप्रीम कोर्ट मार्च में हिस्सा लिया। इस दौरान विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकारों और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाए।

हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भागीदारी ने इस विरोध प्रदर्शन को राज्य की राजनीति से भी जोड़ दिया। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से विपक्ष की उस मांग का समर्थन किया, जिसमें एसआईआर की प्रक्रिया पर उठ रही चिंताओं का जवाब देने और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।

सुक्खू ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही का मुद्दा उठाया

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की मौजूदगी इस राजनीतिक अभियान में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की भागीदारी का प्रमुख पक्ष रही। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ा विषय है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम अनुचित तरीके से सूची से बाहर न हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।

विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग से एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों पर भी आपत्ति जताई और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

सुक्खू और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि हिमाचल कांग्रेस इस मुद्दे पर पार्टी के राष्ट्रीय अभियान के साथ खड़ी है। हालांकि, एसआईआर को लेकर विपक्ष की आशंकाओं और निर्वाचन आयोग के पक्ष का अंतिम आकलन संबंधित तथ्यों, दस्तावेजों और न्यायिक समीक्षा के आधार पर ही किया जा सकेगा।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष

कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य घटक दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।

विपक्ष की योजना सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के माध्यम से अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाने की थी। इस अभियान का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर न्यायिक और सार्वजनिक चर्चा को आगे बढ़ाना है।

दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण उनकी शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया है। ऐसे में एसआईआर का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि केंद्र सरकार, विपक्ष और संवैधानिक संस्थाओं के बीच राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गया है।

हिमाचल कांग्रेस के लिए भी अहम राजनीतिक संदेश

दिल्ली में सुक्खू, अग्निहोत्री और विनय कुमार की मौजूदगी हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी को रेखांकित करती है। प्रदेश नेतृत्व ने विपक्ष के साझा मंच के माध्यम से मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों को समर्थन दिया।

हिमाचल प्रदेश में भी इस घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व है, क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व राष्ट्रीय स्तर पर उठाए जा रहे मुद्दों को अपने संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच प्रमुखता से रख रहा है। आने वाले दिनों में एसआईआर को लेकर पार्टी की गतिविधियां और बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।

फिलहाल, इस विवाद का अगला चरण निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया, विपक्ष की आगे की रणनीति और संबंधित कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगा। विपक्ष जहां जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं इस पूरे मामले में आरोपों और स्थापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना भी जरूरी है।