हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना और सरकार के फैसलों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। यदि लोग अपने मताधिकार को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए और शिकायतों का समाधान करना चाहिए, न कि विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाने चाहिए।

शिमला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सुक्खू ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं को हिरासत में लिए जाने और सार्वजनिक सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इंटरनेट सेवाएं बंद करने, रेलवे स्टेशन बंद करने और प्रदर्शनकारियों को रोकने जैसे कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था में कई सवाल खड़े करते हैं। उनके अनुसार, सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में असहमति की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुना जाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। यदि किसी नागरिक को यह आशंका होती है कि उसके मताधिकार पर असर पड़ रहा है या मतदाता सूची में उसके नाम को लेकर कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसकी शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सुक्खू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के अन्य नेताओं की ओर से उठाए जा रहे सवालों का समर्थन करते हुए कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक विरोध तक सीमित रखने के बजाय कानूनी स्तर पर भी उठाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी सोमवार को प्रस्तावित सुप्रीम कोर्ट मार्च में शामिल होकर अपनी चिंताओं को सामने रखेगी।
दरअसल, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित तौर पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर विपक्ष तथा निर्वाचन आयोग के बीच विवाद तेज हुआ है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया और उसके प्रभावों को लेकर गंभीर सवाल हैं। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना है तथा पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने की स्थिति में उसे दोबारा पंजीकरण कराने का अवसर उपलब्ध है। भाजपा ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उन पर राजनीतिक भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।
दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने, यातायात और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध लगाने तथा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की घटनाओं ने इस विवाद को और व्यापक बना दिया है। विपक्ष इन कदमों को विरोध की आवाज सीमित करने से जोड़ रहा है, जबकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं को प्रमुखता दी गई है।
हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस इस मुद्दे पर सक्रिय रही है। पार्टी ने प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। मुख्यमंत्री सुक्खू के ताजा बयान से स्पष्ट है कि प्रदेश कांग्रेस इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाए जा रहे संविधान, मताधिकार और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों के साथ जोड़कर देख रही है।
सुक्खू का कहना है कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास बनाए रखना सरकार और संवैधानिक संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी की शिकायत का समाधान पारदर्शी तरीके से होना चाहिए, ताकि किसी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित होने की आशंका न रहे। इस पूरे विवाद का अंतिम महत्व इसी बात से जुड़ा है कि चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कायम रहे और नागरिकों को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अवसर मिले।
स्रोत: 10–11 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के बयानों पर इंडिया टुडे और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्टों तथा मतदाता सूची विवाद पर उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के आधार पर स्वतंत्र रूप से तैयार समाचार।
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