पीजी के बाद सीनियर रेजिडेंसी के लिए हिमाचल आने वाले अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने की जरूरत नहीं; मेडिकल कॉलेजों में रेडियोग्राफर्स और ओटीए की नियुक्तियों से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर

शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने और मेडिकल संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा की है। अब पीजी के बाद सीनियर रेजिडेंसी करने के लिए हिमाचल प्रदेश आने वाले उन अभ्यर्थियों को राज्य में दोबारा परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी, जिन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ या एम्स दिल्ली से संबंधित परीक्षा उत्तीर्ण की है। इस फैसले से योग्य चिकित्सकों के लिए हिमाचल के मेडिकल कॉलेजों में सेवाएं देने का रास्ता आसान हो सकता है।
मुख्यमंत्री के इस निर्णय का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों की उपलब्धता स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों और दूर-दराज के गांवों में रहने वाली आबादी को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों की नियुक्ति बेहद जरूरी है। ऐसे में प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से प्रशिक्षण और परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके अभ्यर्थियों के लिए अनावश्यक दोहराव वाली प्रक्रिया को हटाना एक व्यावहारिक कदम साबित हो सकता है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेजों में रेडियोग्राफर्स और ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट (ओटीए) की नियुक्तियों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि सभी मेडिकल कॉलेजों में 10-10 रेडियोग्राफर्स नियुक्त किए गए हैं और ओटीए की नियुक्तियां भी की गई हैं। इन पदों पर कर्मचारियों की उपलब्धता से जांच और ऑपरेशन थिएटर से जुड़ी सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन नियुक्तियों का वास्तविक लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि संबंधित संस्थानों में उपकरण, अन्य आवश्यक स्टाफ और मरीजों के उपचार की सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध हों।
मुख्यमंत्री के अनुसार, जिन स्थानों पर पहले 100 कर्मचारियों की आवश्यकता के मुकाबले केवल 35 कर्मचारी काम कर रहे थे, वहां लगातार प्रयासों के बाद कर्मचारियों की उपलब्धता लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सरकार का लक्ष्य अगले एक वर्ष में इसे बढ़ाकर 80 से 85 प्रतिशत तक पहुंचाना है। यह लक्ष्य पूरा होने पर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कामकाज का दबाव कम करने तथा मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराने में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए केवल अस्पतालों और भवनों का विस्तार पर्याप्त नहीं है। डॉक्टरों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, रेडियोग्राफर्स और तकनीकी कर्मचारियों की पर्याप्त उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। राज्य के ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में मरीजों को कई बार विशेषज्ञ परामर्श या जांच के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। यदि मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध हों और जिला तथा क्षेत्रीय अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार किया जाए, तो मरीजों को समय पर उपचार मिलने के साथ बड़े संस्थानों पर अनावश्यक दबाव भी कम हो सकता है।
पीजीआई चंडीगढ़ और एम्स दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले डॉक्टरों को हिमाचल में सीनियर रेजिडेंसी का अवसर देना इस दिशा में उपयोगी पहल हो सकती है। इससे राज्य के मेडिकल कॉलेजों को योग्य चिकित्सकों को आकर्षित करने में मदद मिलने की संभावना है। साथ ही, सीनियर रेजिडेंट मरीजों के उपचार, मेडिकल शिक्षा और जूनियर डॉक्टरों के प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, इस निर्णय का व्यापक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने अभ्यर्थी हिमाचल में सेवाएं देने के लिए आगे आते हैं और राज्य में उनके लिए कितने पद उपलब्ध हैं।
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का सवाल सीधे आम नागरिक के जीवन और आर्थिक स्थिति से जुड़ा है। समय पर डॉक्टर उपलब्ध न होने या विशेषज्ञ उपचार के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ने से मरीजों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त खर्च तथा मानसिक दबाव पड़ता है। इसलिए डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना, मेडिकल कॉलेजों में जरूरी तकनीकी स्टाफ नियुक्त करना और दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
मुख्यमंत्री सुक्खू द्वारा घोषित निर्णय और कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। अब इन पहलों की सफलता का आकलन इस आधार पर होगा कि आने वाले महीनों में मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में डॉक्टरों की वास्तविक उपलब्धता कितनी बढ़ती है, रिक्त पद कितनी तेजी से भरे जाते हैं और आम मरीज को उपचार के लिए कितना कम इंतजार करना पड़ता है। हिमाचल के लोगों की अपेक्षा है कि इन प्रयासों का लाभ राजधानी और बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ गांवों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों तक भी पहुंचे।





