अभिलाषी विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर किया जागरूकता कार्यक्रम, समावेशी शिक्षा पर विशेष जोर

अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर अभिलाषी विश्वविद्यालय में बुधवार को विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न संकायों के छात्र, शोधार्थी, शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था—समाज में दिव्य

ांगजनों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना, उनके अधिकारों को समझना, उनकी जरूरतों को स्वीकार करना और समावेशी शिक्षा को संस्थागत स्तर पर और अधिक मजबूत बनाना।

कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलसचिव द्वारा दीप प्रज्वलन से की गई। इसके बाद सामाजिक विज्ञान विभाग की ओर से दिव्यांगजनों के अधिकार, वैश्विक नीतियों और भारत में लागू ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016’ पर प्रस्तुति दी गई। वक्ताओं ने बताया कि दुनिया भर में करोड़ों दिव्यांगजन शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सहभागिता की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, और हमारे देश में भी कई समुदायों में जागरूकता की कमी के कारण दिव्यांगजन भेदभाव का सामना करते हैं।

कार्यक्रम में कई दिव्यांगजन छात्रों ने अपनी जीवन यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे सामाजिक संवेदनशीलता, परिवार का सहयोग और संस्थागत सुविधाओं की मदद से वे शिक्षा और करियर में आगे बढ़ पाए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि संस्थान में दिव्यांग छात्रों के लिए रैम्प, विशेष पुस्तकालय सेक्शन, कंप्यूटर स्क्रीन रीडर सॉफ़्टवेयर, अलग सहायक परीक्षा व्यवस्था और मनोवैज्ञानिक परामर्श सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।

मुख्य अतिथि ने कहा कि दिव्यांगजनों को लेकर समाज की सोच में बदलाव सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग व्यक्ति किसी बोझ की तरह नहीं, बल्कि समाज की पूर्ण क्षमता वाले सदस्य हैं। चाहे विज्ञान हो, खेल हो, शिक्षा, कला, संगीत या उद्यमिता—दिव्यांगजन हर क्षेत्र में अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। इसलिए विश्वविद्यालयों और विद्यालयों को चाहिए कि वे न केवल भौतिक सुविधाएँ बढ़ाएँ, बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से भी छात्रों में संवेदनशीलता जगाएँ।

कार्यक्रम में विशेष रूप से दिव्यांग खेल उपलब्धियों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई, जिसमें पैरा-ओलंपिक खिलाड़ियों की सफलताओं को दर्शाया गया था। इससे छात्र काफी प्रेरित हुए। शिक्षकों ने बताया कि आने वाले सत्रों में विश्वविद्यालय दिव्यांग छात्रों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करेगा, जिसमें डिजिटल लिटरेसी, ऑनलाइन वर्क ट्रेनिंग और रोजगार आधारित कोर्स शामिल होंगे।

अंत में कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय यह सुनिश्चित करेगा कि दिव्यांग छात्र न केवल पढ़ाई में, बल्कि हर गतिविधि में बराबर की भागीदारी निभा सकें। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष से विश्वविद्यालय इस दिवस को और बड़े स्तर पर मनाएगा और दिव्यांगजनों से जुड़े शोध प्रोजेक्ट भी शुरू किए जाएंगे।

कार्यक्रम अंत में विश्वविद्यालय द्वारा जारी संकल्प-पत्र के साथ समाप्त हुआ, जिसमें कहा गया कि अभिलाषी विश्वविद्यालय शिक्षण, शोध और सामाजिक विकास में दिव्यांगजनों को बराबर का स्थान देने की दिशा में निरंतर काम करता रहेगा। उपस्थित छात्रों ने भी वादा किया कि वे समाज में संवेदनशीलता की भावना बढ़ाने और दिव्यांगजनों को सम्मान के साथ आगे बढ़ने में सहयोग देंगे।