हिमाचल को 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने का लक्ष्य, छात्र संसद में बोले मुख्यमंत्री सुक्खू

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने छात्र संसद कार्यक्रम के तहत शिमला आए देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों से प्रदेश सचिवालय में संवाद किया और हिमाचल प्रदेश के विकास, लोकतांत्रिक परंपराओं और भविष्य की नीतियों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर आईआईटी, आईआईएम, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय सहित कई नामी संस्थानों के छात्र उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने छात्रों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश देश के सबसे खुशहाल राज्यों में शामिल है और यहां की विकास यात्रा मानवीय मूल्यों, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक सोच पर आधारित रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र की जड़ें बहुत पुरानी हैं और यहां की प्रशासनिक व्यवस्थाएं तथा सामाजिक सरोकार देश-विदेश में एक अलग पहचान रखते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की सफलता के लिए समर्पण, नैतिकता, पारदर्शिता और नेतृत्व क्षमता बेहद जरूरी होती है। ये गुण केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुशासन के बिना अच्छा शासन संभव नहीं है। इसी सोच के तहत सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में सुधार और बदलाव किए हैं। उन्होंने बताया कि हरित हिमाचल के लक्ष्य को लेकर सरकार कई नवाचारी पहल कर रही है और पर्यावरण संरक्षण को विकास की धुरी बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पेट्रोल और डीजल आधारित वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की दिशा में काम कर रही है, जिससे प्रदूषण कम होगा और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने छात्रों को बताया कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना और वर्ष 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाना है। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, सामाजिक सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना, मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना, राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूल और डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना जैसी कई योजनाएं लागू की गई हैं, ताकि जरूरतमंद वर्ग को सीधा लाभ मिल सके।

शिक्षा क्षेत्र पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले दस वर्षों में हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेंगे। छात्रों को भविष्य की जरूरतों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की बेटियां हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं और सरकार उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। प्रशासनिक स्तर पर युक्तिकरण किया जा रहा है ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो सके और आम नागरिकों को बिना भेदभाव सेवाएं मिलें। उन्होंने हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता का जिक्र करते हुए कहा कि यह राज्य अपनी नैसर्गिक और अलौकिक खूबसूरती के साथ-साथ शांतिपूर्ण सामाजिक वातावरण के लिए भी जाना जाता है।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने शासन, पर्यावरण, शिक्षा और प्रशासन से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका मुख्यमंत्री ने सहज और स्पष्ट शब्दों में उत्तर दिया। छात्र संसद कार्यक्रम को छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा गया कि यह पहल युवाओं को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें संसद, विधानसभा और प्रशासन के कामकाज को समझने का व्यावहारिक अनुभव भी देती है, जिससे वे देश के जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बन सकें।

इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (नवीनीकरण, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस) गोकुल बुटेल, छात्र संसद के अध्यक्ष आदित्य बेगड़ा, पदाधिकारी शशांक शेखर पांडेय, मानस तिवारी सहित वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।