चार्जशीट समिति की बैठक के बाद सियासी टकराव तेज: भाजपा का सुक्खू सरकार पर ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ का आरोप, एफआईआर को बनाया बड़ा मुद्दा

हिमाचल प्रदेश में सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा के प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता राजिंदर राणा ने दावा किया कि 25 जुलाई को पार्टी की चार्जशीट समिति की बैठक के बाद से मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और राज्य सरकार की “बेचैनी” साफ दिखाई देने लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं और कथित घोटालों से जनता का ध्यान हटाने के लिए विपक्षी नेताओं के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराने की रणनीति पर काम कर रही है।

राजिंदर राणा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रदेश की राजनीति एक ऐसे दौर में पहुंच गई है, जहां सरकार की आलोचना करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को हथियार बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले लगभग पौने चार वर्षों के दौरान सरकार के कार्यकाल में सामने आए विभिन्न विवादों और प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में आज जो परिस्थितियां बन रही हैं, वे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं। राणा ने दावा किया कि सरकार की कार्यशैली वर्ष 1975 के आपातकाल की याद दिलाती है, जहां असहमति की आवाज को दबाने के लिए प्रशासनिक और कानूनी संस्थाओं का इस्तेमाल किया जाता था। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सरकार की नीतियों या कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी जाती है।

भाजपा प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पत्रकार और मीडिया संस्थान भी इस कथित दबाव से अछूते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई पत्रकार समाचार पत्रों, डिजिटल मंचों या सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की कमियों और विफलताओं को उजागर करता है, तो उसे भी विभिन्न तरीकों से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।

राजिंदर राणा ने भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के खिलाफ दर्ज एफआईआर का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए इसे पूरी तरह राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में संबंधित विभागों द्वारा पहले ही कई स्तरों पर जांच की जा चुकी थी। उनके अनुसार विजिलेंस विभाग ने निरीक्षण किया, आयकर विभाग ने भी आवश्यक जांच पूरी की और सभी दस्तावेज नियमों के अनुरूप पाए गए। इसके बावजूद सरकार के दबाव में पुलिस अधिकारियों से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अब यह भी सामने आ रहा है कि अधिकारियों पर किस स्तर तक दबाव बनाया गया।

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल धर्मशाला तक सीमित नहीं है। भाजपा का आरोप है कि देहरा, हमीरपुर और अन्य क्षेत्रों के भाजपा विधायकों के साथ-साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं को भी विभिन्न मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। राणा ने कहा कि विपक्ष को डराने और उसकी राजनीतिक गतिविधियों को सीमित करने के लिए पुलिस और प्रशासन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश की जनता ने उन्हें तीन पहचानें दे दी हैं। पहली, सबसे अधिक झूठ बोलने वाले मुख्यमंत्री की; दूसरी, प्रदेश पर सबसे अधिक कर्ज का बोझ बढ़ाने वाले मुख्यमंत्री की; और तीसरी, सबसे अधिक झूठी एफआईआर दर्ज कराने वाले मुख्यमंत्री की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कानून-व्यवस्था, नशा तस्करी, बढ़ते अपराध, गोलीबारी और हत्या जैसी गंभीर चुनौतियों पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय अपनी ऊर्जा राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई कराने में लगा रही है।

राणा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी किसी भी अपराध के खिलाफ निष्पक्ष और तथ्य आधारित जांच की पक्षधर है। यदि किसी व्यक्ति ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित होकर झूठे मुकदमे दर्ज करना लोकतांत्रिक मूल्यों और हिमाचल प्रदेश की शांतिपूर्ण राजनीतिक परंपरा के विपरीत है।

भाजपा ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह राजनीतिक टकराव की राजनीति से ऊपर उठकर सुशासन, पारदर्शिता और जनहित से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे। पार्टी का कहना है कि प्रदेश की जनता विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था और आर्थिक चुनौतियों के समाधान की अपेक्षा कर रही है, जबकि सरकार का ध्यान विपक्ष के साथ राजनीतिक संघर्ष में अधिक दिखाई दे रहा है।

हालांकि, इन आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चार्जशीट समिति की सक्रियता और विपक्ष के बढ़ते हमलों के बीच हिमाचल की राजनीति आने वाले महीनों में और अधिक आक्रामक होने के संकेत दे रही है। इस बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर प्रदेश की राजनीति को और अधिक गर्माने वाला माना जा रहा है।