जब छोटा पहाड़ी राज्य राष्ट्रीय स्टार्टअप विमर्श का केंद्र बन गया

भारत के स्टार्टअप मानचित्र पर अक्सर बड़े औद्योगिक राज्यों के नाम छाए रहते हैं, लेकिन इस बार राष्ट्रीय मंच पर एक छोटा पहाड़ी राज्य चर्चा के केंद्र में है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी), भारत सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को ‘टॉप परफॉर्मर’ स्टेट का दर्जा मिलना केवल एक प्रशासनिक सम्मान नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है, जो मानती है कि नवाचार का आकार भूगोल से तय नहीं होता।

हिमाचल प्रदेश जैसे सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य के लिए यह मान्यता कई मायनों में ऐतिहासिक है। यह साबित करती है कि यदि नीति स्पष्ट हो, शासन में निरंतरता हो और युवाओं को अवसर मिले, तो पहाड़ों से भी स्टार्टअप की मजबूत आवाज़ उठ सकती है।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में स्टार्टअप इंडिया पहल के दस वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में यह सम्मान मिलना इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार भी अब हिमाचल को केवल पर्यटन या सेब उत्पादन तक सीमित नहीं देख रही, बल्कि उसे एक उभरते हुए नवाचार केंद्र के रूप में स्वीकार कर रही है। संयुक्त निदेशक उद्योग दीपिका खत्री और जिला उद्योग केंद्र ऊना के संयुक्त निदेशक अंशुल धीमान द्वारा पुरस्कार प्राप्त किया जाना प्रशासनिक स्तर पर किए गए ठोस प्रयासों की पुष्टि करता है।

स्टार्टअप इंडिया पहल के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर नई दिल्ली में यह राष्ट्रीय सम्मान मिलना इस बात का प्रमाण है कि हिमाचल प्रदेश अब नवाचार आधारित विकास मॉडल की ओर निर्णायक रूप से अग्रसर है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के नेतृत्व में उद्योग विभाग द्वारा तैयार किया गया नीति ढांचा स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता, बाजार संपर्क और निवेश के अवसर उपलब्ध करा रहा है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) आर. डी. नज़ीम के अनुसार, यह मान्यता राज्य सरकार के उस विज़न की पुष्टि है, जिसमें हिमाचल को उभरते स्टार्टअप और नवाचार केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। उद्योग विभाग के निदेशक डॉ. यूनुस ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार स्टार्टअप्स को पूंजी, निर्यात अवसर और अकादमिक सहयोग से जोड़कर उन्हें लोकल से ग्लोबल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का यह कहना कि यह उपलब्धि राज्य के युवाओं की प्रतिभा और उद्यमशीलता की पहचान है, महज़ औपचारिक बयान नहीं लगता। हाल के वर्षों में हिमाचल में स्टार्टअप्स को लेकर जो नीति-आधारित ढांचा विकसित हुआ है, उसने पहाड़ के युवाओं को रोजगार मांगने वाले से रोजगार देने वाला बनने का आत्मविश्वास दिया है।

इस आत्मविश्वास की झलक हिम एमएसएमई फेस्ट 2026 में साफ दिखाई दी, जहाँ ₹10 लाख से अधिक की प्रत्यक्ष बिक्री और पुष्ट प्री-ऑर्डर दर्ज हुए। यह आंकड़ा भले ही महानगरों के बड़े आयोजनों की तुलना में छोटा लगे, लेकिन हिमाचल जैसे राज्य के लिए यह बाजार में विश्वास की ठोस मुहर है। खासतौर पर पर्यटन, ऑर्गेनिक उत्पाद, वन आधारित उद्योग और डी2सी हिमालयन ब्रांड्स की मजबूत उपस्थिति यह संकेत देती है कि हिमाचल का स्टार्टअप मॉडल स्थानीय संसाधनों पर आधारित और टिकाऊ है।

निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और दूसरे चरण की निवेश चर्चाओं के लिए स्टार्टअप्स का चयन यह दर्शाता है कि हिमाचल अब प्रयोग का राज्य नहीं, बल्कि संभावनाओं का राज्य बन रहा है। डीपीआईआईटी की ‘टॉप परफॉर्मर’ मान्यता इसी बदलाव की राष्ट्रीय स्वीकृति है।


इस विज़न का जीवंत उदाहरण हिम एमएसएमई फेस्ट 2026 में देखने को मिला, जिसे 3–4 जनवरी को शिमला में आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटित इस आयोजन में मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना के अंतर्गत 28 स्टार्टअप्स और 4 छात्र स्टार्टअप्स ने भाग लिया। ₹10 लाख से अधिक की ऑन-स्पॉट बिक्री और पुष्ट प्री-ऑर्डर इस बात का प्रमाण हैं कि हिमाचल के स्टार्टअप्स बाजार की कसौटी पर खरे उतर रहे हैं।

पर्यटन, एग्री-टेक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, आईटी, वन आधारित उत्पाद और वेलनेस जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स की मजबूत उपस्थिति यह दर्शाती है कि राज्य सरकार का फोकस रोजगार सृजन के साथ-साथ सतत विकास पर भी है। निवेशकों और नीति निर्माताओं के साथ सीधे संवाद ने स्टार्टअप्स के लिए नए विस्तार और निवेश के रास्ते खोले हैं।

डीपीआईआईटी द्वारा प्रदान की गई ‘टॉप परफॉर्मर’ मान्यता हिमाचल प्रदेश के लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि यह संकेत है कि राज्य सरकार का नवाचार-आधारित विकास मॉडल सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर हिमाचल और सशक्त भारत के निर्माण में राज्य की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।