शिमला।
हिमाचल प्रदेश की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नए आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वरिष्ठ लेखक एवं भाषा एवं संस्कृति विभाग के पूर्व सहायक निदेशक तथा हिमाचल प्रदेश किसान कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता त्रिलोक सूर्यवंशी द्वारा लिखित पुस्तक ‘जाखू मन्दिर–संजीवनी बूटी का रहस्य’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुस्तक को राज्य की सांस्कृतिक धरोहर, धार्मिक पर्यटन और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कृति बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जाखू मंदिर केवल शिमला ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश की धार्मिक पहचान का एक प्रमुख केंद्र है। ऐसी पुस्तकें न केवल आस्था से जुड़े स्थलों के ऐतिहासिक और पौराणिक पक्ष को सामने लाती हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनती हैं। उन्होंने लेखक त्रिलोक सूर्यवंशी के शोधपरक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक श्रद्धालुओं, शोधकर्ताओं, इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों सभी के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के कारण विश्वभर में पहचान रखता है। राज्य सरकार भी ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित कर रही है, जिनसे प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार हो तथा सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिल सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक जाखू मंदिर से जुड़ी मान्यताओं और शिमला की ऐतिहासिक विरासत को देश-विदेश के पाठकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
‘जाखू मन्दिर–संजीवनी बूटी का रहस्य’ में लेखक ने विश्व प्रसिद्ध जाखू मंदिर के पौराणिक इतिहास, भगवान हनुमान से जुड़ी संजीवनी बूटी की कथा, मंदिर से संबंधित अनेक रोचक तथ्यों तथा स्थानीय लोकमान्यताओं का विस्तृत वर्णन किया है। इसके साथ ही पुस्तक में शिमला के ऐतिहासिक विकास, विरासत भवनों, प्रमुख धार्मिक स्थलों और अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है, जिससे यह पुस्तक केवल धार्मिक साहित्य तक सीमित न रहकर हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत का एक समग्र दस्तावेज बन जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के शोध आधारित प्रकाशन धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय इतिहास और लोकसंस्कृति के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। जाखू मंदिर प्रतिवर्ष देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस पुस्तक के माध्यम से उन्हें मंदिर की धार्मिक महत्ता के साथ-साथ शिमला के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विकास की भी व्यापक जानकारी प्राप्त होगी।
पुस्तक विमोचन समारोह में लेखक त्रिलोक सूर्यवंशी की धर्मपत्नी माया सूर्यवंशी, जगमोहन शर्मा, पूर्ण चंद तथा अजय भारद्वाज भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पुस्तक की विषयवस्तु और इसके सांस्कृतिक महत्व पर भी चर्चा की गई तथा हिमाचल की ऐतिहासिक विरासत को भावी पीढ़ियों तक संरक्षित और प्रासंगिक बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया।





