शिमला किसान कांग्रेस ने संभाला मोर्चा, किसानों-बागवानों के मुद्दों को पंचायत स्तर तक ले जाने पर जोर

शिमला: जिला शिमला किसान कांग्रेस की नवगठित कार्यकारिणी ने संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने और किसानों-बागवानों से जुड़े मुद्दों को मजबूती के साथ उठाने की दिशा में अपनी पहली बैठक के साथ अभियान की शुरुआत कर दी है। जिला अध्यक्ष कुमारी ममता ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रवि शर्मा और जिला कांग्रेस अध्यक्ष एच.के. हिमराल विशेष रूप से मौजूद रहे।

बैठक में नवगठित जिला किसान कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का परिचय कराया गया तथा संगठन की आगामी गतिविधियों और कार्ययोजना को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य फोकस संगठन को केवल जिला मुख्यालय तक सीमित रखने के बजाय ब्लॉक, पंचायत और गांव स्तर तक सक्रिय करने पर रहा।


बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सरकार की किसान हितैषी योजनाओं और नीतियों की जानकारी किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए। इसके लिए संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर किसानों के साथ निरंतर संवाद स्थापित करने तथा उनकी समस्याओं को समझकर संबंधित मंचों तक पहुंचाने की भूमिका निभाने पर जोर दिया गया।

किसान कांग्रेस नेतृत्व ने कहा कि हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में किसान और बागवान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं को केवल राजनीतिक मुद्दे के तौर पर देखने के बजाय उन्हें नियमित रूप से सरकार और प्रशासन के समक्ष उठाना संगठन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

जिला अध्यक्ष ममता ठाकुर ने किसानों के साथ निरंतर संपर्क और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी पहल पर जोर दिया। उन्होंने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ जिला शिमला के अलग-अलग क्षेत्रों में किसानों और बागवानों तक पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता बताई। बैठक में यह संदेश दिया गया कि किसान कांग्रेस की सक्रियता का आधार जमीनी संवाद और स्थानीय समस्याओं की पहचान होगी।

प्रदेश अध्यक्ष रवि शर्मा ने कार्यकर्ताओं से संगठन को बूथ और पंचायत स्तर तक मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने किसान और बागवानी क्षेत्र से संबंधित सरकार की विभिन्न योजनाओं और पहलों की जानकारी कार्यकर्ताओं के साथ साझा की और कहा कि इन योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए संगठन को ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

हालिया दिनों में हिमाचल कांग्रेस ने भी संगठन को जिला मुख्यालयों से आगे ब्लॉक, पंचायत और गांव स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया है। पार्टी की संगठनात्मक बैठकों में बूथ स्तर की सक्रियता, कार्यकर्ताओं के साथ निरंतर संवाद और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को प्रमुखता दी जा रही है।

बैठक में जिला कांग्रेस अध्यक्ष एच.के. हिमराल ने संगठन की मजबूती के साथ पार्टी की विचारधारा और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों पर चर्चा की। उन्होंने कार्यकर्ताओं से स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच सक्रिय रहने और संगठनात्मक गतिविधियों को नियमित रूप से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

किसान कांग्रेस की बैठक ऐसे समय में हुई है जब हिमाचल प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। हाल में प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की बैठकों में भी जिला और ब्लॉक स्तर के संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा तथा जमीनी सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

बैठक में ‘मिशन रिपीट’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक एकजुटता और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी पर भी चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि चुनावी तैयारियों को केवल चुनाव के नजदीक आने तक सीमित रखने के बजाय लगातार जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों के माध्यम से मजबूत आधार तैयार करने की जरूरत है।

किसान कांग्रेस के लिए शिमला जिला विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यहां कृषि और बागवानी से जुड़े क्षेत्रों के साथ-साथ सेब उत्पादक किसानों की बड़ी आबादी है। किसानों को बाजार, उत्पादन लागत, बागवानी से जुड़े संसाधनों और सरकारी योजनाओं तक पहुंच जैसे मुद्दों पर लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जिला स्तर पर किसान संगठन की सक्रियता का सीधा संबंध ग्रामीण क्षेत्रों में उसकी पहुंच और किसानों के साथ संवाद से होगा।

हाल ही में किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रवि शर्मा ने भी किसानों और बागवानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने तथा संगठन का विस्तार करने की बात कही है। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और गांवों में आय के अवसर बढ़ाने से जुड़े विषयों पर भी जोर दिया।

शिमला जिला किसान कांग्रेस की पहली बैठक से अब संगठन के सामने अगली चुनौती इस कार्ययोजना को जमीन पर लागू करने की होगी। पंचायत स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता, किसानों की समस्याओं का नियमित फीडबैक और सरकार तक प्रभावी तरीके से मुद्दे पहुंचाना संगठन की आगामी गतिविधियों की दिशा तय करेगा।

बैठक का संदेश स्पष्ट रहा कि किसान कांग्रेस को केवल राजनीतिक संगठन के रूप में नहीं, बल्कि किसानों और बागवानों के बीच संवाद के एक सक्रिय माध्यम के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जाएगी। आने वाले महीनों में संगठन की वास्तविक सक्रियता इस बात से तय होगी कि वह कितनी मजबूती से गांवों तक पहुंच बनाता है और स्थानीय कृषि-बागवानी समस्याओं को नीति और प्रशासन के स्तर तक ले जाता है।