हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की नौहराधार तहसील में बीती रात हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। घंडूरी पटवार वृत्त के अंतर्गत आने वाले गांव तलांगना में देर रात करीब अढ़ाई बजे अचानक लगी आग में एक ही परिवार के छह लोगों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें तीन मासूम बच्चे भी शामिल हैं। यह हृदय विदारक घटना न केवल एक परिवार की खुशियां लील गई, बल्कि ग्रामीण इलाकों में अग्नि सुरक्षा और समय रहते सतर्कता की अहमियत पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आग मोहन सिंह पुत्र रामदयाल के रिहायशी मकान में उस समय लगी, जब घर में मौजूद सभी लोग गहरी नींद में थे। मकान में कुल आठ लोग मौजूद थे। मोहन सिंह की पत्नी इंद्रा देवी को जैसे ही आग लगने का आभास हुआ, उन्होंने तत्काल सूझबूझ दिखाते हुए खुद को सुरक्षित बाहर निकाला और गांव में शोर मचाकर लोगों को सचेत किया। उनकी तत्परता से गांव के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक आग विकराल रूप धारण कर चुकी थी। ग्रामीणों की मदद से केवल एक व्यक्ति को ही सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।
इस भीषण हादसे में जिन लोगों की जान गई, उनकी पहचान नरेश (पुत्र दुर्गा सिंह, निवासी टपरोली, राजगढ़), उनकी पत्नी तृप्ता, कविता (पत्नी लोकेन्द्र, निवासी खुमड़ा, तहसील चौपाल) और उनके तीन मासूम बच्चों सारिका, कृतिका व कृतिक के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि यह सभी लोग मोहन सिंह के घर मायके में मेहमान बनकर आए हुए थे। आग इतनी भयावह थी कि शवों की पहचान करना भी अत्यंत कठिन हो गया।
घटना में लोकेन्द्र (42), निवासी खुमड़ा, तहसील चौपाल को ग्रामीणों ने गंभीर हालत में आग से बाहर निकाला। उनकी स्थिति नाजुक होने के कारण उन्हें तत्काल उपचार के लिए सोलन अस्पताल रेफर किया गया है। पटवारी द्वारा तैयार की गई प्रारंभिक रिपोर्ट में इस भारी जनहानि की पुष्टि की गई है।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा उपायों की अनदेखी और समय पर सावधानी न बरतने के दुष्परिणामों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिहायशी मकानों में ज्वलनशील वस्तुओं का सुरक्षित भंडारण, बिजली के उपकरणों की नियमित जांच, रसोई और हीटर जैसी जगहों पर अतिरिक्त सतर्कता, तथा आपात स्थिति में त्वरित निकासी के उपाय बेहद जरूरी हैं। समय रहते छोटी सी सतर्कता बड़े हादसों को टाल सकती है।
नौहराधार की इस त्रासदी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि आग जैसी आपदाओं से बचाव के लिए जागरूकता, सतर्कता और सामूहिक जिम्मेदारी बेहद आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का अपूरणीय नुकसान न झेलना पड़े।






