हमीरपुर में निर्माणाधीन फोरलेन पुल का हिस्सा गिरा, तीन घायल; लॉन्चिंग के दौरान तकनीकी खराबी से हुआ हादसा



हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश में शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य के दौरान शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया। हमीरपुर बाईपास के पास हथली खड्ड पर निर्माणाधीन ट्रस ब्रिज का एक बड़ा हिस्सा लॉन्चिंग के दौरान अचानक नीचे जा गिरा। हादसे में तीन लोग घायल हुए हैं, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को उपचार के लिए हमीरपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया।

यह हादसा उस समय हुआ जब करीब 90 मीटर लंबे स्टील ट्रस ब्रिज को लॉन्चिंग की प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा रहा था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुल की लॉन्चिंग के दौरान तकनीकी खराबी आने से संरचना का संतुलन बिगड़ा और उसका एक हिस्सा खड्ड में जा गिरा। घटनास्थल के नीचे गहरी खड्ड होने के कारण हादसे की गंभीरता और बढ़ गई। NHAI के अनुसार पुल के मुख्य पियर्स को नुकसान नहीं पहुंचा है। हादसे के वास्तविक कारणों की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है।

यह पुल शिमला-मटौर फोरलेन कॉरिडोर के तहत हमीरपुर बाईपास का हिस्सा है। संबंधित निर्माण खंड कोहली से चील बहाल के बीच करीब 17 किलोमीटर लंबे हिस्से में आता है। यह पूरा फोरलेन प्रोजेक्ट हिमाचल प्रदेश में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने वाली महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल है।

लॉन्चिंग के दौरान कैसे हुआ हादसा?

निर्माणाधीन पुल को तैयार स्थिति में लाने के लिए स्टील ट्रस को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा था। इसी प्रक्रिया को लॉन्चिंग या पुशिंग तकनीक कहा जाता है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जब ट्रस को आगे बढ़ाया जा रहा था, उसी दौरान तकनीकी खराबी आई और संरचना का एक हिस्सा अपने निर्धारित सहारे से नीचे खिसक गया।

NHAI की ओर से तत्काल उपलब्ध कराई गई जानकारी में इसे तकनीकी खराबी से जुड़ी घटना बताया गया है। हालांकि, यह अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं है। विशेषज्ञों की तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि खराबी किस उपकरण या प्रणाली में आई, लॉन्चिंग के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं और घटना के पीछे कोई अन्य तकनीकी कारण भी था या नहीं।

हादसे के बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहत एवं बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर घायलों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल सबसे अहम पहलू घायलों का उपचार और घटनास्थल को सुरक्षित करना है।

NHAI की बड़ी परियोजना, इसलिए जांच भी महत्वपूर्ण

शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना का कुल अनुमानित खर्च करीब 10,000 करोड़ रुपये बताया गया है, जिसमें भूमि अधिग्रहण के लिए दिया जाने वाला मुआवजा भी शामिल है। इतनी बड़ी सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजना में निर्माण के प्रत्येक चरण की गुणवत्ता और सुरक्षा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसका उद्देश्य लंबे समय तक राज्य के सड़क नेटवर्क को मजबूत करना है।

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क और पुल निर्माण मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक जटिल होता है। गहरी खड्डें, पहाड़ी ढलान, भूगर्भीय परिस्थितियां और सीमित कार्यस्थल इंजीनियरिंग टीमों के सामने अतिरिक्त चुनौतियां पैदा करते हैं। ऐसे में पुल की लॉन्चिंग जैसी तकनीकी प्रक्रिया के दौरान उपकरण, अस्थायी सपोर्ट, भार संतुलन और सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी जरूरी होती है।



देशभर में NHAI के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी नजर

हमीरपुर का यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब देश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और निर्माण निगरानी को लेकर व्यापक स्तर पर चर्चा चल रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से जुड़े आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2026 के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में 48 ढहने, संरचनात्मक विफलता और गंभीर कमियों के मामले दर्ज हुए हैं। मंत्रालय से जुड़े विवरणों में इनमें खराब निर्माण कार्य, डिजाइन संबंधी कमियों और अपर्याप्त निगरानी जैसे कारणों का उल्लेख किया गया है।

वहीं, जुलाई 2026 में सरकार ने राज्यसभा में बताया था कि 2025 और 2026 के दौरान 19 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में नए बने पुलों और फ्लाईओवरों से जुड़े ढहने, धंसने या संरचनात्मक विफलता के मामले सामने आए। इन मामलों के सिलसिले में अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी।

अगस्त में केंद्र सरकार ने संसद को यह भी बताया था कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर 471 पुलों में संरचनात्मक कमजोरी या क्षति की पहचान की गई है। इनमें से 159 पुलों पर सुधारात्मक कार्य पूरा हो चुका था, जबकि 312 पुलों की मरम्मत का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक रखा गया है।

इन राष्ट्रीय आंकड़ों को हमीरपुर हादसे से सीधे जोड़ना अभी उचित नहीं होगा। हथली खड्ड हादसे की जांच अभी जारी है और फिलहाल NHAI की प्रारंभिक जानकारी तकनीकी खराबी की ओर संकेत करती है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस हादसे के पीछे निर्माण गुणवत्ता, डिजाइन या निगरानी में कमी थी।

NHAI ने शुरू किए विशेष गुणवत्ता निरीक्षण

राष्ट्रीय स्तर पर सामने आई चिंताओं के बीच NHAI ने हाल ही में नौ राज्यों में निर्माणाधीन 17 हाईवे परियोजनाओं के विशेष गुणवत्ता निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की है। इन परियोजनाओं में ऐसे काम शामिल किए गए हैं जिनकी अनुमानित लागत 500 करोड़ रुपये से अधिक है, जिनमें ठेकेदारों की बोली अनुमानित लागत से 15 प्रतिशत से अधिक कम रही और जिनका निर्माण 35 से 80 प्रतिशत तक पूरा हुआ है।

इन निरीक्षणों में अनुभवी और सेवानिवृत्त इंजीनियरों की टीमें निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की जा रही सामग्री, कारीगरी, स्वीकृत डिजाइन और तकनीकी मानकों के पालन की जांच करेंगी। NHAI ने बड़े पुलों के डिजाइन की स्वतंत्र तकनीकी जांच के लिए IIT और अन्य प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों को भी अपने साथ जोड़ने की पहल की है।

अब जांच बताएगी हादसे की असली वजह

हमीरपुर में हथली खड्ड पर हुआ हादसा फिलहाल एक निर्माणाधीन पुल की लॉन्चिंग के दौरान हुई तकनीकी विफलता के रूप में सामने आया है। लेकिन असली सवाल यह है कि लॉन्चिंग के दौरान किस स्तर पर खराबी आई और क्या निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरी तरह लागू किए जा रहे थे।

तकनीकी विशेषज्ञों की जांच इस घटना के प्रत्येक पहलू की समीक्षा करेगी। जांच के निष्कर्ष यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि हादसा केवल उपकरण की तकनीकी खराबी के कारण हुआ या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी था।

शिमला-मटौर फोरलेन जैसी हजारों करोड़ रुपये की परियोजना में सड़क का निर्माण जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण उन पुलों और संरचनाओं की सुरक्षा है जिन पर भविष्य में हजारों वाहन गुजरेंगे। इसलिए हमीरपुर का यह हादसा केवल तत्काल राहत और मरम्मत का मामला नहीं है, बल्कि निर्माण प्रक्रिया में तकनीकी जांच, सुरक्षा मानकों और जवाबदेही को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।