हरियाणा सरकार का संवेदनशील कदम: मृतकों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों में शव वाहन सेवा अनिवार्य

हरियाणा सरकार ने मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक गरिमा को प्राथमिकता देते हुए राज्य के सभी जिलों में शव वाहन सेवाओं की अनिवार्य उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी उपायुक्तों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक पूर्णतः कार्यशील शव वाहन सेवा हर हाल में उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि मृत व्यक्तियों का सम्मानजनक और सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित किया जा सके।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि किसी भी समाज की संवेदनशीलता का आकलन इस बात से भी होता है कि वह अपने मृतकों के साथ किस प्रकार का व्यवहार करता है। शव वाहन केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि मृत व्यक्ति की गरिमा और उसके परिजनों के सम्मान से जुड़ी एक आवश्यक सेवा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई जिलों में भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से शव वाहन सेवाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन इन सेवाओं की जानकारी आम नागरिकों तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पा रही है।

इसी को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि शव वाहन सेवाओं की उपलब्धता, संचालन एजेंसी और संपर्क नंबरों की जानकारी को व्यापक रूप से सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में यह सेवा भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, किसी प्रतिष्ठित एनजीओ या किसी अन्य विधिवत अधिकृत एजेंसी के माध्यम से व्यवस्थित की जा सकती है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाए कि सेवा निरंतर और भरोसेमंद हो।

डॉ. मिश्रा ने यह भी निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले के सिविल सर्जन यह सुनिश्चित करें कि सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शव वाहन सेवाओं से संबंधित संपर्क नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएं। इनमें जिला अस्पताल, उप-मंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मेडिकल कॉलेज, मुर्दाघर, पोस्टमार्टम केंद्र और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थान शामिल होंगे। इसका उद्देश्य यह है कि जरूरत के समय आम लोगों को जानकारी के लिए भटकना न पड़े और वे तुरंत संबंधित सेवा से संपर्क कर सकें।

उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि जनहित से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए इस मामले में अनुपालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। सभी उपायुक्तों और स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से इसकी समीक्षा करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि एम्बुलेंस और शव वाहन दोनों की भूमिका अलग-अलग है। एम्बुलेंस विशेष रूप से आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और बीमार या घायल व्यक्तियों के सुरक्षित परिवहन के लिए सुसज्जित और एर्गोनॉमिक रूप से डिजाइन किए गए वाहन होते हैं, जबकि शव वाहन मृत व्यक्तियों के सम्मानजनक परिवहन के लिए होते हैं। दोनों सेवाओं की अपनी-अपनी अहमियत है और इन्हें आपस में भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए।

हरियाणा सरकार का यह कदम न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि राज्य में किसी भी नागरिक को अंतिम समय में अपमानजनक परिस्थितियों का सामना न करना पड़े। यह निर्णय स्वास्थ्य सेवाओं के मानवीय पक्ष को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।