हिमाचल प्रदेश में लगातार बिगड़ते मौसम और भूस्खलन की घटनाओं ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। पर्वतीय जिलों में भारी बारिश, बर्फबारी और तेज हवाओं के चलते सड़क मार्गों की स्थिति लगातार खराब हो रही है, जिससे यात्रियों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
ताजा घटनाक्रम में कुल्लू जिला की मणिकर्ण-बरशेणी सड़क पर एक कार अचानक मलबे की चपेट में आ गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि चालक और वाहन में सवार अन्य लोग सुरक्षित बच गए। यह घटना इस बात का संकेत है कि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा किस हद तक बढ़ चुका है, जहां अचानक गिरता मलबा जानलेवा साबित हो सकता है।
इसी बीच मनाली में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। यहां राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा दोबारा धंसने की खबर सामने आई है, जिससे यातायात बाधित होने की आशंका और बढ़ गई है। यह मार्ग न केवल स्थानीय आवाजाही बल्कि पर्यटन गतिविधियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, ऐसे में इसकी स्थिति राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डाल सकती है।
मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जिसमें चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला और कुल्लू शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भारी वर्षा, ओलावृष्टि और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। लगातार बदलते मौसम ने पहाड़ी ढलानों को और अधिक अस्थिर बना दिया है, जिससे भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाओं में वृद्धि हो रही है।
लाहौल-स्पीति में भी एक गंभीर घटना सामने आई, जहां पहाड़ों से गिरते पत्थरों की चपेट में आकर एक टैक्सी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में एक दंपति घायल हो गया, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाया गया। यह घटना दर्शाती है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा करना इस समय कितना जोखिम भरा हो चुका है।
लगातार हो रही बर्फबारी और बारिश के कारण प्रदेश के तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। औसत तापमान सामान्य से लगभग 2.3 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया है, जिससे ठंड का असर फिर से बढ़ गया है और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति मुख्यतः सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण बनी हुई है, जिसके 10 अप्रैल के आसपास कमजोर पड़ने के बाद ही राहत मिलने की उम्मीद है। तब तक प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पर्यटकों और स्थानीय लोगों को संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम से जुड़े अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।
राज्य सरकार और जिला प्रशासन द्वारा संवेदनशील मार्गों की निगरानी बढ़ा दी गई है, वहीं आपदा प्रबंधन टीमें भी अलर्ट पर हैं। हिमाचल प्रदेश, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है, फिलहाल मौसम की इस चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे में सुरक्षा और सतर्कता ही सबसे बड़ा उपाय बनकर सामने आ रही है।





