शिमला: हिमाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस पार्टी और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संसद में नारी शक्ति वंदन कानून से जुड़े घटनाक्रम ने कांग्रेस की महिलाओं के प्रति सोच को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं को राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देने के उद्देश्य से ऐतिहासिक पहल की, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इस अवसर का समर्थन करने के बजाय इसका विरोध किया। बिंदल ने आरोप लगाया कि वर्षों तक महिला आरक्षण के मुद्दे को टालने वाली कांग्रेस अब भी इसे प्रभावी रूप से लागू करने के प्रति गंभीर नहीं है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं और अब उन्हें नीति निर्माण में समान भागीदारी देने का समय आया था। उनके अनुसार, इस महत्वपूर्ण चरण पर विरोध करना महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ खड़ा होना है।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कानून के पारित न होने के बाद जिस प्रकार से कुछ नेताओं द्वारा प्रतिक्रिया दी गई, वह यह दर्शाता है कि महिलाओं के मुद्दे को राजनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है, न कि सामाजिक न्याय के रूप में। बिंदल ने यह भी आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश के कांग्रेस नेता इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने से बच रहे हैं, जो उनकी नीति और नीयत दोनों पर सवाल खड़े करता है।
इसी संदर्भ में उन्होंने 23 अप्रैल को शिमला में “जन आक्रोश पदयात्रा” आयोजित करने की घोषणा की। उनके अनुसार, इस यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं भाग लेंगी और इसे महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के समर्थन में एक व्यापक जन आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रेस वार्ता के दौरान बिंदल ने राज्य सरकार पर पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने चुनाव प्रक्रिया को समय पर पूरा करने में सहयोग नहीं किया और संवैधानिक व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास किया। उनके अनुसार, चुनाव आयोग को इस संबंध में राज्यपाल को विस्तृत पत्र भेजना पड़ा, जिसमें प्रशासनिक सहयोग की कमी का उल्लेख किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र से स्थानीय निकायों के विकास के लिए प्राप्त वित्तीय संसाधनों का उचित उपयोग नहीं किया गया और उन्हें अन्य उद्देश्यों के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। इस कारण गांवों और शहरों में विकास कार्य प्रभावित हुए और स्थानीय प्रतिनिधियों के अधिकार सीमित हो गए।
बिंदल ने कहा कि शहरी निकाय चुनावों की घोषणा लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती का संकेत है और इसे जनता तथा न्याय व्यवस्था की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में पंचायती राज चुनाव भी घोषित होंगे और जनता अपने मताधिकार के माध्यम से सरकार को जवाब देगी।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में एक ओर केंद्र सरकार है जो महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रही है, जबकि दूसरी ओर विपक्ष पर उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने और जनहित के मुद्दों से भटकने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, अंतिम निर्णय जनता के हाथ में है, जो आने वाले चुनावों में अपनी राय स्पष्ट रूप से व्यक्त करेगी।





