हरियाणा में पिछले कुछ समय से जारी सफाई और अग्निशमन कर्मचारियों की हड़ताल अब समाप्ति की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, क्योंकि राज्य सरकार ने कर्मचारियों की कई महत्वपूर्ण मांगों को स्वीकार कर लिया है। बुधवार को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर और प्रधान सचिव अरुण गुप्ता की मौजूदगी में कर्मचारी संगठनों के साथ करीब छह घंटे तक चली लंबी बातचीत के बाद सहमति बनी। इस वार्ता को दो चरणों में आयोजित किया गया, जिसमें सरकार और कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में ठोस प्रगति हुई।
इस समझौते के तहत ठेका प्रणाली के तहत कार्यरत सफाई कर्मचारियों के वेतन में बड़ा सुधार किया गया है। अब इन कर्मचारियों को न्यूनतम 15,220 रुपये मासिक वेतन मिलेगा, जबकि पहले यह राशि केवल 7 से 8 हजार रुपये के बीच थी। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि यदि किसी ठेकेदार द्वारा नियमों में गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। कर्मचारियों को अब राज्य कर्मचारी बीमा (ESI) और कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी मिलेगा, जो अब तक बड़ी संख्या में श्रमिकों को उपलब्ध नहीं था।
सरकार ने कर्मचारियों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मृत्यु सहायता राशि को तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया है। इसके साथ ही मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आश्रितों के लिए 25 वर्ष की आयु सीमा की शर्त को भी हटा दिया गया है, जिससे अधिक परिवारों को इस सुविधा का लाभ मिल सकेगा।
वार्ता के दौरान कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा भी प्रमुख रहा। फरीदाबाद के 111 कर्मचारियों, जिन्होंने अदालत में अपना मामला जीता था, उनके साथ-साथ 150 अन्य कर्मचारियों को भी स्थायी नियुक्ति देने पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, पे-रोल पर कार्यरत लगभग 1,250 कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय लिया गया है, जिसमें आयु सीमा और सीटेट जैसी शर्तों में भी छूट दी जाएगी।
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि युक्तिकरण (रैशनलाइजेशन) के तहत चार से साढ़े चार हजार नए पद सृजित किए जाएंगे, जिससे लगभग 900 कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। सफाई कर्मचारियों के कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने के लिए उन्हें आवश्यक सामग्री जैसे तेल और साबुन भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि वेतन का भुगतान अब बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। ड्यूटी के दौरान किसी दुर्घटना में मृत्यु होने पर आश्रितों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, वर्दी और जोखिम भत्ते के रूप में पांच-पांच हजार रुपये देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
इन फैसलों के बाद कर्मचारी संगठनों ने रोहतक में प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है, जिसमें इस समझौते पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। संकेत मिल रहे हैं कि यदि सभी मांगों के क्रियान्वयन का भरोसा मिलता है, तो कर्मचारी हड़ताल समाप्त करने का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं।
यह घटनाक्रम हरियाणा में श्रमिक अधिकारों और प्रशासनिक संवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां एक ओर सरकार ने कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को स्वीकार कर राहत देने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट हुआ है कि संगठित वार्ता और दबाव के माध्यम से श्रमिक अपने अधिकारों को हासिल करने में सक्षम हैं।





