सुखविंदर सिंह सुक्खू खुद बने उदाहरण: इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल से ईंधन बचत की पहल, लोगों से अपनाने की अपील

हिमाचल में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर जोर: सरकार ने बढ़ाई सब्सिडी, हजार बसों की नई योजना की तैयारी

हिमाचल प्रदेश सरकार ने ईंधन की बढ़ती लागत और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत स्तर पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य न केवल डीज़ल-पेट्रोल की खपत कम करना है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित करना है।

सरकार द्वारा लागू की गई राजीव गांधी स्वरोजगार योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है। इस योजना के अंतर्गत उच्च कीमत वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर सरकार आधी तक की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, जिससे युवाओं और उद्यमियों को इस क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है। इसके साथ ही, इन वाहनों को सरकारी विभागों से जोड़कर नियमित आय का स्रोत भी सुनिश्चित किया गया है, जो इस योजना को स्वरोजगार के एक स्थायी मॉडल के रूप में स्थापित करता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न विभागों में लगभग 100 इलेक्ट्रिक वाहन संचालित हो रहे हैं। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इस संख्या को और बढ़ाने के लिए नए टेंडर जारी किए जाएंगे। यह पहल सरकारी परिवहन प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से हरित ऊर्जा आधारित बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

परिवहन क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी की जा रही है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) पहले ही सैकड़ों इलेक्ट्रिक बसों को अपने बेड़े में शामिल कर चुका है, जिससे सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाया गया है। अब सरकार ने इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए एक हजार नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की योजना बनाई है। यह कदम राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में स्वच्छ और किफायती परिवहन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि ईंधन की बचत केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश इस दिशा में एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जहां नीति और व्यवहार दोनों स्तरों पर हरित ऊर्जा को अपनाया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह न केवल प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर भी उत्पन्न करेगा। हिमाचल प्रदेश की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल के रूप में देखी जा रही है, जहां स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को भविष्य की आवश्यकता के रूप में तेजी से अपनाया जा रहा है।