तीन वर्षों में एचआरटीसी पेंशनरों को 239 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ, कर्मचारियों को भी मिला 74 करोड़ रुपये का वित्तीय संबल

शिमला।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य परिवहन निगम (एचआरटीसी) के वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के आर्थिक हितों को मजबूत करने की दिशा में पिछले तीन वर्षों के दौरान महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार का कहना है कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद पेंशनरों और कर्मचारियों के लंबित दावों के निस्तारण, नियमित भुगतान और सेवा संबंधी लाभों को प्राथमिकता देते हुए व्यापक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।

परिवहन विभाग के एक प्रवक्ता ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि एक जनवरी 2023 से 30 मार्च 2026 तक की अवधि में एचआरटीसी के पेंशनरों को कुल 239.45 करोड़ रुपये के विभिन्न वित्तीय लाभ प्रदान किए गए हैं। इसी अवधि में निगम के कार्यरत कर्मचारियों को भी वेतन, भत्तों और अन्य देयकों के रूप में 74.39 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई है।

सरकार का कहना है कि यह केवल वित्तीय भुगतान का मामला नहीं है, बल्कि उन हजारों कर्मचारियों और पेंशनरों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का प्रयास है, जिन्होंने दशकों तक राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रवक्ता के अनुसार, 31 जुलाई 2025 तक लगभग 350 पेंशनरों को करीब 35 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। वहीं 805 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी (डीसीआरजी) और अवकाश नकदीकरण (लीव एनकैशमेंट) के मद में लगभग 174.45 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसके अतिरिक्त चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति के रूप में 2.75 करोड़ रुपये भी जारी किए गए।

वरिष्ठ पेंशनरों को भी विशेष राहत प्रदान की गई। 75 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 700 पेंशनरों को संशोधित पेंशन के रूप में 24 करोड़ रुपये वितरित किए गए। इसके अलावा 3,800 पेंशनरों को पेंशन भत्ते के रूप में 2.50 करोड़ रुपये दिए गए, जबकि संशोधित पेंशन के 50 और 30 प्रतिशत पे-मैट्रिक्स लाभ के तहत लगभग 3,500 पेंशनरों को 75 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि प्रदान की गई।

कार्यरत कर्मचारियों के लिए भी सरकार ने कई वित्तीय दायित्वों का निर्वहन किया। कुल 74.39 करोड़ रुपये के भुगतान में से 27.74 करोड़ रुपये ओवरटाइम और रात्रिकालीन ड्यूटी भत्तों के रूप में जारी किए गए। राज्य सरकार के कर्मचारियों के समान 45 प्रतिशत महंगाई भत्ता और उसके एरियर के भुगतान के लिए 5.50 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के रूप में 1.77 करोड़ रुपये जारी किए गए, जबकि वेतन और अन्य सेवा लाभों से संबंधित बकाया राशि के भुगतान पर 39.38 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

सरकार ने केवल वित्तीय सहायता तक ही अपने प्रयास सीमित नहीं रखे, बल्कि निगम में मानव संसाधन को भी मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए। इस अवधि के दौरान 2,198 संविदा कर्मचारियों को नियमित किया गया, जिससे उन्हें सेवा सुरक्षा और स्थायी रोजगार का लाभ मिला।

भर्ती प्रक्रिया को भी गति देते हुए वर्ष 2023 से 2025 के बीच कुल 691 नई नियुक्तियां की गईं। इनमें कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से 327 परिचालकों (कंडक्टरों) की नियुक्ति शामिल है। इसके अलावा पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के माध्यम से भी नियुक्तियां की गईं, जबकि 145 पीसमील कर्मचारियों को नियमित रोजगार व्यवस्था में शामिल किया गया।

परिवहन विभाग का कहना है कि हिमाचल प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास में एचआरटीसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। राज्य के दूर-दराज़ और दुर्गम क्षेत्रों तक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों का योगदान उल्लेखनीय रहा है। ऐसे में वर्तमान सरकार निगम की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों की रक्षा के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है।

प्रवक्ता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल वित्तीय प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक कर्मचारी और पेंशनर को समय पर उसका अधिकार सुनिश्चित करना भी है। इसी सोच के तहत वेतन, पेंशन और अन्य सेवा लाभों के भुगतान को व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक सुधार किए जा रहे हैं।

सरकार का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने में वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। इसलिए उनकी आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक सम्मान को प्राथमिकता देते हुए मानवीय दृष्टिकोण के साथ निर्णय लिए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी एचआरटीसी की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाने और कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े कदमों को इसी प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

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