चिंतपूर्णी मंदिर की ‘सुगम दर्शन’ व्यवस्था में करोड़ों की गड़बड़ी की आशंका, एफआईआर दर्ज; सात दिन में रिपोर्ट सौंपेगी एडीसी जांच

हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर की ‘सुगम दर्शन’ व्यवस्था में सामने आई संभावित वित्तीय और तकनीकी अनियमितताओं ने प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शुरू की गई इस प्रणाली में लेन-देन से जुड़ी गंभीर विसंगतियों के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल एफआईआर दर्ज कराते हुए बहुस्तरीय जांच शुरू कर दी है। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत प्रशासनिक जांच के लिए अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) ऊना को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिन्हें सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

यह मामला इसलिए भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यह किसी निजी संस्था से नहीं, बल्कि राज्य सरकार के अधीन संचालित देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक की व्यवस्था से जुड़ा है। ऐसे में जांच केवल तकनीकी खामियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि कहीं सरकारी निगरानी व्यवस्था में चूक या किसी स्तर पर मिलीभगत तो नहीं हुई।

मंदिर ट्रस्ट की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 19 जुलाई को ‘सुगम दर्शन’ प्रणाली में संभावित अनियमितता का मामला ट्रस्ट के संज्ञान में आया। इसके बाद उपायुक्त ऊना जतिन लाल को तत्काल अवगत कराया गया, जिन्होंने बिना देरी किए पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही प्रणाली में कार्यरत कर्मचारियों को तत्काल हटाकर उनकी जगह नए कर्मचारियों की तैनाती की गई, ताकि जांच के दौरान रिकॉर्ड और साक्ष्यों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो।

प्रारंभिक जांच के लिए मंदिर ट्रस्ट ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया। समिति द्वारा 19 जुलाई के सॉफ्टवेयर रिकॉर्ड और लेन-देन का तकनीकी विश्लेषण किया गया। जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार उस दिन वास्तविक रूप से केवल 23 लेन-देन हुए थे, जबकि सॉफ्टवेयर में 88 लेन-देन दर्ज दिखाई दे रहे थे। यानी सिस्टम में 65 अतिरिक्त प्रविष्टियां मौजूद थीं, जिनका वास्तविक लेन-देन से कोई मेल नहीं मिला।

प्रथम दृष्टया जांच में आशंका जताई गई है कि किसी अनधिकृत व्यक्ति ने सॉफ्टवेयर के लॉगिन आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग कर सिस्टम में अतिरिक्त प्रविष्टियां दर्ज की हों। हालांकि, मंदिर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत तकनीकी जांच और प्रशासनिक रिपोर्ट के बाद ही निकाला जाएगा।

हालांकि अभी तक किसी वित्तीय नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जिस प्रकार लेन-देन के रिकॉर्ड और सिस्टम डेटा में बड़ा अंतर सामने आया है, उसने पूरे मामले को अत्यंत गंभीर बना दिया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि क्या यह केवल तकनीकी छेड़छाड़ का मामला है या इसके पीछे आर्थिक लाभ प्राप्त करने की कोई सुनियोजित साजिश भी थी।

उपायुक्त जतिन लाल ने मामले की प्रशासनिक जांच के लिए अतिरिक्त उपायुक्त ऊना को जिम्मेदारी सौंपी है। जांच अधिकारी पूरे घटनाक्रम से जुड़े अभिलेखों, डिजिटल रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा करेंगे। साथ ही यह भी निर्धारित किया जाएगा कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रक्रियागत और प्रशासनिक सुधारों की भी सिफारिश की जाएगी।

मंदिर ट्रस्ट के सहायक आयुक्त एवं एसडीएम अंब पारस अग्रवाल ने बताया कि ‘सुगम दर्शन’ प्रणाली वर्ष 2023 में श्रद्धालुओं, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों को व्यवस्थित एवं सुविधाजनक दर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इस व्यवस्था के माध्यम से अब तक 12 करोड़ रुपये से अधिक का सेवा शुल्क प्राप्त हुआ है। ट्रस्ट का कहना है कि इस राशि का उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार, जनकल्याण और सामाजिक सहायता से जुड़े कार्यों में किया जाता है।

ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि ‘सुगम दर्शन’ के लिए लिया जाने वाला शुल्क मंदिर का दान या चढ़ावा नहीं है, बल्कि यह एक निर्धारित सेवा शुल्क है। मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे का अलग से पारदर्शी लेखा-जोखा रखा जाता है और उसका इस सेवा शुल्क से कोई संबंध नहीं है।

तकनीकी सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के साथ भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि सॉफ्टवेयर सुरक्षा, उपयोगकर्ता प्रमाणीकरण और डिजिटल निगरानी प्रणाली को इस स्तर तक मजबूत किया जाए कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनधिकृत पहुंच या डेटा से छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो सके।

उधर, पुलिस ने दर्ज एफआईआर के आधार पर अपनी जांच शुरू कर दी है। डिजिटल साक्ष्यों, लॉग रिकॉर्ड, उपयोगकर्ता गतिविधियों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी प्रकार की आपराधिक साजिश, वित्तीय अनियमितता या साइबर अपराध के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट या भ्रामक सूचना पर विश्वास न करें तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं को ही प्रमाणिक मानें। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और तथ्यों के आधार पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

चिंतपूर्णी मंदिर जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल की व्यवस्था में सामने आई यह संभावित अनियमितता केवल एक प्रशासनिक जांच का विषय नहीं है, बल्कि यह सरकारी निगरानी, डिजिटल सुरक्षा और सार्वजनिक आस्था से जुड़ा गंभीर मामला बन चुका है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सात दिन बाद आने वाली जांच रिपोर्ट इस रहस्य से कितना पर्दा उठाती है और क्या वास्तव में यह केवल तकनीकी चूक थी या फिर श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ किसी बड़े खेल की शुरुआत।