कुल्लू में जल शक्ति विभाग के जूनियर इंजीनियर लाभ सिंह गुलेरिया की रहस्यमयी हत्या की गुत्थी आखिरकार पुलिस ने सुलझा ली है। कई दिनों तक अंधेरे में रही इस ‘ब्लाइंड मर्डर’ की जांच ने ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। पुलिस ने इस मामले में एक महिला डॉक्टर, उनके डॉक्टर पति, ससुर और देवर सहित एक ही परिवार के चार लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हत्या की वजह कथित तौर पर अवैध संबंधों का शक था।
यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश, विश्वासघात और कानून को अपने हाथ में लेने की मानसिकता का भी प्रतीक बन गया है। जिस तरह से हत्या की कथित योजना बनाई गई और बाद में उसे दुर्घटना अथवा सामान्य हमले का रूप देने की कोशिश की गई, उसने जांच एजेंसियों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 52 वर्षीय जूनियर इंजीनियर लाभ सिंह गुलेरिया को 24 जुलाई को कुल्लू के गांधीनगर स्थित एक आवास पर पानी की पाइपलाइन से संबंधित कार्य देखने के बहाने बुलाया गया था। यह मकान क्षेत्रीय अस्पताल में कार्यरत महिला डॉक्टर का बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि जैसे ही वह वहां पहुंचे, पहले से मौजूद महिला डॉक्टर के पति, ससुर और देवर ने कथित रूप से उन पर हमला कर दिया।
आरोप है कि चारों ने मिलकर लाभ सिंह गुलेरिया के साथ बेरहमी से मारपीट की। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें उनके कार्यालय के निकट सड़क किनारे छोड़ दिया गया ताकि घटना को किसी अन्य रूप में प्रस्तुत किया जा सके। देर रात जब परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की तो पहले उनकी स्कूटी कार्यालय के पास खड़ी मिली और कुछ दूरी पर वह गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़े मिले।
परिजन उन्हें तत्काल कुल्लू अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए एम्स बिलासपुर रेफर किया गया। दो दिनों तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद उनकी मौत हो गई। इसके बाद यह मामला हत्या में बदल गया और पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव चौहान के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने चार दिनों तक लगातार तकनीकी और वैज्ञानिक जांच की। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ी। इस दौरान महिला डॉक्टर के घर में कार्यरत नौकरानी के बयान बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए। उसके बयानों ने पुलिस को घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में मदद की। बाद में उसके बयान न्यायालय के समक्ष भी दर्ज कराए गए।
जांच में पुलिस को ऐसे संकेत मिले कि आरोपियों को लंबे समय से यह संदेह था कि मृतक जूनियर इंजीनियर और महिला डॉक्टर के बीच कथित रूप से निजी संबंध थे। इसी शक ने धीरे-धीरे हिंसक रूप ले लिया और अंततः कथित तौर पर हत्या की साजिश रची गई। हालांकि पुलिस अभी इस पूरे घटनाक्रम की हर कड़ी की पुष्टि कर रही है और जांच जारी है।
गिरफ्तार आरोपियों में क्षेत्रीय अस्पताल में कार्यरत महिला डॉक्टर, लाहौल-स्पीति में तैनात उनके डॉक्टर पति, उनके ससुर और देवर शामिल हैं। पुलिस ने तीन आरोपियों का मेडिकल परीक्षण भी कराया है और सभी को न्यायालय में पेश करने की तैयारी की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला शुरुआत में पूरी तरह ‘ब्लाइंड मर्डर’ था क्योंकि घटनास्थल पर प्रत्यक्ष साक्ष्य बेहद सीमित थे। लेकिन वैज्ञानिक जांच, डिजिटल साक्ष्यों और मानवीय खुफिया जानकारी के समन्वय से पूरी साजिश का खुलासा संभव हो सका। पुलिस अब हत्या में प्रयुक्त परिस्थितियों, संभावित योजना और प्रत्येक आरोपी की भूमिका की अलग-अलग जांच कर रही है।
यह मामला हिमाचल प्रदेश में इसलिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इसमें दो चिकित्सकों सहित प्रतिष्ठित पेशे से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। इससे न केवल पूरे चिकित्सा समुदाय बल्कि आम लोगों के बीच भी गहरी चिंता पैदा हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
पुलिस जल्द ही इस पूरे मामले पर विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जांच के निष्कर्षों और आरोपियों की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का आधिकारिक खुलासा कर सकती है। तब तक यह हत्याकांड प्रदेश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो चुका है, जिसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि व्यक्तिगत संदेह और अविश्वास जब कानून से ऊपर हो जाते हैं, तो उसके परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं।





