धर्मशाला : कांग्रेस के पूर्व मंत्री एवं विधायक सुधीर शर्मा ने एक प्रेस बयान जारी कर अपने खिलाफ जारी नोटिस और एफआईआर को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। शर्मा का मुख्य आरोप है कि संबंधित नोटिस 11 अगस्त को ही मीडिया में उपलब्ध करा दिया गया, जबकि उनके कार्यालय में इसकी आधिकारिक तामील 12 अगस्त को हुई। उन्होंने इसे लेकर सवाल उठाया है कि यदि नोटिस का उद्देश्य उन्हें आरोपों की जानकारी देकर अपना पक्ष रखने का अवसर देना था, तो इसकी विषय-वस्तु उनके पास पहुंचने से एक दिन पहले मीडिया तक कैसे पहुंची।
शर्मा ने कहा कि घटनाक्रम से यह आशंका पैदा होती है कि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलने से पहले ही उनके खिलाफ सार्वजनिक धारणा बनाने का प्रयास किया गया। उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय, निष्पक्ष प्रक्रिया और निर्दोषता की धारणा से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
प्रेस बयान में शर्मा ने एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, उन्होंने कथित उत्पीड़न और अपने खिलाफ कार्रवाई को लेकर धर्मशाला के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष विजिलेंस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की थी। इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। शर्मा ने घटनाओं के इस क्रम को प्रतिशोध की आशंका से जोड़ते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच से जुड़ी चयनात्मक या एकतरफा जानकारी मीडिया में पहले पहुंचने से मीडिया ट्रायल का माहौल बन सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शर्मा ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका और कानून के शासन पर पूरा विश्वास है तथा वह किसी भी निष्पक्ष जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने मांग की कि नोटिस के मीडिया तक पहुंचने, एफआईआर के समय और परिस्थितियों तथा विजिलेंस अधिकारियों के खिलाफ उनके द्वारा शुरू की गई कानूनी कार्रवाई के बाद हुए घटनाक्रम की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।






