। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने अपने संगठन को बूथ स्तर से सक्रिय करने की तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने घोषणा की है कि 20 सितंबर से पूरे पंजाब में बड़े पैमाने पर घर-घर जनसंपर्क अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर बूथ कमेटियों के सदस्य तक सीधे मतदाताओं से संपर्क करेंगे और मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के करीब साढ़े चार साल के कामकाज को लोगों के सामने रखेंगे।
AAP के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि पार्टी के लगभग 2.68 लाख बूथ कमेटी सदस्य घर-घर जाएंगे। उनके मुताबिक यह केवल सरकार की उपलब्धियां बताने का कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि कार्यकर्ता परिवारों से बातचीत करेंगे और यह समझने की कोशिश भी करेंगे कि सरकार की योजनाओं और फैसलों का लोगों पर क्या असर पड़ा है।
सिसोदिया ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान स्वयं अपने विधानसभा क्षेत्र धूरी में घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करेंगे। पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी अपने-अपने क्षेत्रों में इसी तरह का अभियान चलाएंगे। अभियान की शुरुआत से एक दिन पहले, 19 सितंबर को लुधियाना में मुख्यमंत्री भगवंत मान पार्टी के चुनावी अभियान का पैंफलेट जारी करेंगे।
यह पहल ऐसे समय में शुरू हो रही है जब पंजाब में राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की हाल में हुई बैठक में भी पंजाब सहित आगामी चुनावों की रणनीति पर चर्चा हुई। मनीष सिसोदिया ने बैठक के बाद कहा कि पार्टी पंजाब में चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और लोगों के बीच अपने काम का हिसाब लेकर जाएगी।
AAP इस अभियान के साथ अपना सदस्यता अभियान भी शुरू करेगी। इसका उद्देश्य पार्टी के मौजूदा संगठन को सक्रिय रखने के साथ-साथ नए लोगों को संगठन से जोड़ना है। बूथ स्तर पर इतने बड़े नेटवर्क को सक्रिय करने की योजना से संकेत मिलता है कि पार्टी चुनावी तैयारी को केवल बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय सीधे घरों और स्थानीय इलाकों तक ले जाना चाहती है।
सिसोदिया ने सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए विशेष रूप से नशे के खिलाफ अभियान, शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि पंजाब की युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए सरकार ने व्यापक कार्रवाई की है और पिछली सरकारों पर राज्य में नशे की समस्या को बढ़ने देने का आरोप लगाया। ये सिसोदिया और AAP के राजनीतिक दावे हैं; विपक्षी दल सरकार के नशा-विरोधी अभियान और उसके परिणामों पर सवाल उठाते रहे हैं।
नशे का मुद्दा आने वाले राजनीतिक अभियान में पहले से ही प्रमुख बन चुका है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल में पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में कहा था कि सरकार का ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान निर्णायक चरण में पहुंच गया है और नशा तस्करों तथा सप्लायरों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए थे। सरकार ने स्थानीय स्तर पर Village Defence Committees की भागीदारी को भी अभियान का हिस्सा बनाया है।
शिक्षा के मोर्चे पर भी सिसोदिया ने सरकारी स्कूलों में आधुनिक सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का दावा किया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में बदलाव से अभिभावकों के बीच संतुष्टि बढ़ी है। AAP का यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज है।
सिसोदिया ने नौजवानों, व्यापारियों और महिलाओं को लेकर भी सरकार के प्रति संतोष का दावा किया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती और विभिन्न सामाजिक समूहों की राय क्षेत्र और मुद्दे के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
AAP के अभियान की एक और खासियत यह होगी कि पार्टी सरकार के कामकाज को सीधे परिवारों के आर्थिक अनुभव से जोड़ने की कोशिश कर रही है। पार्टी की प्रस्तावित ‘मान दे मुनाफे’ मुहिम में यह बताया जाएगा कि सरकार की योजनाओं और फैसलों से एक परिवार को कितना आर्थिक लाभ मिला, ऐसा पार्टी का दावा है।
इस बीच भाजपा ने भी 18 सितंबर से पंजाब में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू की है, जो राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुंचने और करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली है। कांग्रेस भी रोजगार, नशे और शासन से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेर रही है। ऐसे माहौल में AAP का घर-घर अभियान पंजाब की चुनावी राजनीति में जमीनी स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
20 सितंबर से शुरू होने वाला अभियान इसलिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि इसका वास्तविक असर केवल बड़े नेताओं की सभाओं से नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और मतदाताओं के साथ उनके संवाद से तय होगा। आने वाले महीनों में घर-घर पहुंचने वाली यह राजनीतिक मुहिम पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले AAP की संगठनात्मक रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा बन सकती है।






